ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण Nifty 50 में आज भारी दबाव देखा गया। इंडेक्स **0.64%** की गिरावट के साथ **24,022** के स्तर पर बंद हुआ है। अमेरिकी-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और फेडरल रिजर्व की नीतियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार में मची बिकवाली की असली वजह
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को भारतीय बाजारों के लिए दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। Nifty 50 में 0.64% की गिरावट ने निवेशकों के सेंटिमेंट को हिला दिया है। इस कमजोरी के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव मुख्य कारण है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान से बढ़ते तनाव ने क्रूड ऑयल की कीमतों को 1-2% से अधिक ऊपर धकेल दिया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है, जिससे बाजार में चौतरफा बिकवाली दिख रही है।
फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का दबाव
सिर्फ जियोपॉलिटिकल टेंशन ही नहीं, बल्कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Kevin Warsh के हालिया बयानों ने भी निवेशकों को डराया है। सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से इमर्जिंग मार्केट की इक्विटीज पर दबाव बढ़ गया है। उधार लेने की बढ़ती लागत और ग्लोबल अनिश्चितता ने इक्विटी निवेशकों को 'डिफेंसिव मोड' में जाने पर मजबूर कर दिया है।
चार्ट्स पर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?
टेक्निकल तौर पर देखें तो Nifty 50 ने 24,250 का अपना अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है। अब बाजार की नजर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर टिकी है। अगर यह स्तर नहीं संभला, तो आने वाले दिनों में इंडेक्स 23,800 के निचले स्तरों की ओर खिसक सकता है। फिलहाल संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की ओर से भी बिकवाली जारी है, जो दर्शाता है कि बाजार अभी और सतर्कता की मांग कर रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह है कि अभी क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीक नजर रखें और किसी भी बड़े फैसले से पहले बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।
