Narnolia Financial Services के CIO शैलेन्द्र कुमार भारतीय बाजार को लेकर काफी बुलिश हैं। उन्होंने लंबी अवधि के लिए सकारात्मक आउटलुक जताते हुए कहा है कि FY30 तक होने वाला **₹31 लाख करोड़** का कैपिटल स्पेंडिंग भारतीय शेयरों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
मार्केट में मजबूत फंडामेंटल्स
Narnolia Financial Services के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेन्द्र कुमार का मानना है कि भारतीय बाजार में इस समय रिस्क-रिवॉर्ड (Risk-Reward) का तालमेल काफी संतुलित है। ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती पोर्टफोलियो के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच (Buffer) बनी हुई है।
निवेश के तीन मुख्य स्तंभ
मार्केट का भविष्य मुख्य रूप से तीन बड़े थीम्स पर टिका है:
- कैपिटल स्पेंडिंग (Capex): FY27 से FY30 के बीच भारत में सालाना ₹31 लाख करोड़ का निवेश होने का अनुमान है। यह पैसा सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनर्जी ट्रांजिशन, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में बहेगा।
- उपभोक्ता मांग (Consumption): देश में बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम के कारण कंजम्पशन का चलन अब एक परमानेंट ट्रेंड बन चुका है, जो घरेलू मांग वाली कंपनियों को सहारा दे रहा है।
- सेविंग्स का फाइनेंशियल होना: अर्थव्यवस्था के फॉर्मलाइज होने से बचत के निवेश में बदलने का सिलसिला तेज हुआ है।
सिलेक्टिव स्टॉक पिकिंग जरूरी
हालांकि लंबी अवधि के लिए आउटलुक शानदार है, लेकिन ब्रोकरेज ने सलाह दी है कि निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है। आईटी (IT) और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सेक्टरों में मार्जिन का दबाव दिख रहा है, लेकिन कुछ अच्छी कंपनियां अब पहले के मुकाबले सस्ते वैल्यूएशन पर मिल रही हैं। वहीं, फाइनेंशियल सेक्टर में ब्याज दरों की अस्थिरता को देखते हुए चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाना बेहतर होगा।
HDFC Bank और ग्लोबल चुनौतियां
शैलेन्द्र कुमार ने HDFC Bank जैसे संस्थानों में लीडरशिप ट्रांजिशन को मॉनिटर करने की सलाह दी है, ताकि ऑपरेशनल रिस्क कम रहे। रही बात ग्लोबल टैरिफ (Tariff) और अंतरराष्ट्रीय दबाव की, तो बाजार ने इसे काफी हद तक पहले ही डिस्काउंट कर लिया है। अब निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनियां अपनी लागत को कैसे मैनेज कर रही हैं और कैसे वे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
