NSE का बड़ा दांव: Electronic Gold Receipts से FY30 तक ₹1,260 करोड़ की कमाई का लक्ष्य

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AuthorAditya Rao|Published at:
NSE का बड़ा दांव: Electronic Gold Receipts से FY30 तक ₹1,260 करोड़ की कमाई का लक्ष्य

ब्रोकरेज फर्म Jefferies का अनुमान है कि NSE का Electronic Gold Receipts (EGR) बिजनेस वित्त वर्ष 2030 तक **₹1,260 करोड़** के सालाना रेवेन्यू तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ के लिए एक्सचेंज अपने ट्रेडिंग वॉल्यूम और फिजिकल कलेक्शन सेंटर्स के नेटवर्क को बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

बाजार विस्तार की रणनीति

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने Electronic Gold Receipts (EGR) सेगमेंट को तेजी से विस्तार दे रहा है। इसका मकसद भारत में बुलियन के लिए एक सेंट्रलाइज्ड स्पॉट मार्केट तैयार करना है, जिसे काफी हद तक 'शंघाई गोल्ड एक्सचेंज' के मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

प्रोडक्ट की खासियत और चुनौतियां

EGR का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि निवेशक अपने डिजिटल होल्डिंग्स को फिजिकल गोल्ड में कन्वर्ट कर सकते हैं। यह उन निवेशकों के लिए बेहतरीन है जो पारदर्शिता के साथ सोने की फिजिकल डिलीवरी चाहते हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि फिजिकल गोल्ड लेते समय 3% का GST देना होगा, जो रिटेल डिमांड पर असर डाल सकता है। इसे और लोकप्रिय बनाने के लिए एक्सचेंज अगले एक साल में 1,000 से अधिक कलेक्शन सेंटर खोलने और कम कीमत वाले डिनॉमिनेशन पेश करने की योजना बना रहा है।

अन्य सेगमेंट में भी तेजी

NSE सिर्फ सोने के कारोबार तक सीमित नहीं है। एक्सचेंज अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स और म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर भी फोकस कर रहा है। WTI क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स के दम पर कमोडिटी सेगमेंट का योगदान FY30 तक दोगुना होकर कम से कम 2% होने की उम्मीद है। वहीं, फिनटेक पार्टनरशिप्स के जरिए म्यूचुअल फंड ऑर्डर प्लेटफॉर्म की मार्केट हिस्सेदारी 35% तक पहुंचने का अनुमान है।

ये नए सेगमेंट मिलकर एक्सचेंज की प्रॉफिटेबिलिटी को बड़ी रफ्तार दे सकते हैं, जो FY26 के अनुमानित प्रॉफिट का 13% से अधिक हो सकते हैं। निवेशकों को अब इन सेंटर्स के विस्तार और ट्रेडिंग वॉल्यूम में आने वाली बढ़ोतरी पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.