NCC Limited ने जून तिमाही में पिछले साल के मुकाबले **12.2%** की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी के पास **₹81,000 करोड़** से ज़्यादा का मजबूत ऑर्डर बुक है। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए रेवेन्यू बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। नतीजों के बाद, ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने **₹195** के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है।
Q1 में NCC का दमदार प्रदर्शन
NCC Limited ने नए फाइनेंशियल ईयर की शानदार शुरुआत की है। जून 30, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के नतीजों में कंपनी के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12.2% का इजाफा हुआ है, जो लगभग ₹5,812 करोड़ तक पहुंच गया। नेट प्रॉफिट में भी बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹216.4 करोड़ पर पहुंच गया, जो बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
मजबूत ऑर्डर बुक और डिविडेंड
कंपनी का ऑपरेशनल परफॉरमेंस भी मजबूत बना हुआ है, कंसॉलिडेटेड EBITDA मार्जिन बढ़कर 9.4% हो गया है। इस प्रदर्शन को कंपनी की ₹81,214 करोड़ की जबरदस्त ऑर्डर बुक का सहारा मिला है, जो कि 30 जून, 2026 तक की स्थिति है। यह ऑर्डर बुक कंपनी के सालाना रेवेन्यू का लगभग चार गुना है, जो भविष्य की कमाई के लिए एक स्पष्ट विजिबिलिटी प्रदान करती है। इसके अलावा, कंपनी ने शेयरधारकों के लिए ₹2.20 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है, जिसका रिकॉर्ड डेट 14 अगस्त, 2026 तय की गई है।
मैनेजमेंट का भरोसा और ब्रोकरेज की राय
नतीजों के ऐलान के बाद, मैनेजमेंट ने FY27 के बाकी समय के लिए गाइडेंस जारी किया है। कंपनी 8% से 10% के बीच रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रही है और EBITDA मार्जिन 8.5% से 9.0% के बीच स्थिर रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने इस अपडेट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टॉक पर अपनी 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹195 तय किया है। फर्म ने कंपनी के बेहतर एग्जीक्यूशन और मजबूत ऑर्डर बुक को ग्रोथ के मुख्य कारण बताया है।
आगे की राह और संभावित चुनौतियाँ
हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे ग्रोथ दिखा रहे हैं, लेकिन यह सेक्टर पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्चों के प्रति संवेदनशील है। निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल को कितनी कुशलता से मैनेज कर पाती है। NCC, जल जीवन मिशन जैसी सरकारी परियोजनाओं से भुगतान की समय-सीमा से संबंधित चुनौतियों का सामना करना जारी रखे हुए है। कलेक्शन सामान्य हो रहे हैं, लेकिन सरकारी क्लाइंट्स से भुगतान में किसी भी तरह की देरी से कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है और उधारी पर निर्भरता बढ़ सकती है।
इसके अलावा, हालांकि कर्ज का स्तर फिलहाल कंट्रोल में है, लेकिन बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट पर नज़र रखना ज़रूरी होगा, खासकर तब जब कंपनी स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट्स जैसी नई पहलों में निवेश कर रही है। कंपनी की भारी-भरकम ऑर्डर बुक को बिना किसी बड़े कॉस्ट ओवररन या लेबर संबंधी देरी के समय पर एग्जीक्यूट करने की क्षमता, मार्जिन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में नए ऑर्डर के प्रवाह की गति और मौजूदा प्रोजेक्ट्स से कलेक्शन की प्राप्ति पर नज़र रखनी चाहिए ताकि कंपनी की वित्तीय सेहत का अंदाजा लगाया जा सके।
