Muthoot Microfin आज 28 अगस्त, 2026 को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCD) के जरिए फंड जुटाने पर विचार करने के लिए बोर्ड कमेटी की बैठक करेगी। कंपनी का लक्ष्य अपने लोन पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए 40% हिस्सा नॉन-JLG कैटेगरी से जोड़ना है।
फंड जुटाने की तैयारी और रणनीति
कंपनी ने फंड जुटाने के लिए आज 28 अगस्त, 2026 को बोर्ड की एक अहम मीटिंग बुलाई है। इस कदम का मुख्य मकसद बिजनेस ग्रोथ को रफ्तार देना और लिक्विडिटी मैनेज करना है। Muthoot Microfin अब अपने पारंपरिक 'जॉइंट-लायबिलिटी ग्रुप' (JLG) लेंडिंग मॉडल से आगे बढ़कर पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने पर जोर दे रही है।
पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
कंपनी आने वाले दो सालों में अपने नॉन-JLG लोन पोर्टफोलियो को कुल बुक का 40% तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी गोल्ड लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग जैसे कम जोखिम वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है। हाल ही में कंपनी की क्रेडिट रेटिंग AA- हुई है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि उनकी बॉरोइंग कॉस्ट में 30 से 40 बेसिस पॉइंट्स की कमी आएगी। इससे कंपनी के नेट इंटरेस्ट मार्जिन को मजबूती मिलने की संभावना है।
वित्तीय नतीजे और बाजार का हाल
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹81.3 करोड़ रहा है, जिसके बाद मैनेजमेंट ने अपनी ग्रोथ गाइडेंस को और बेहतर किया है। फिलहाल शेयर ₹205 के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि, दिग्गज कंपनी 'CreditAccess Grameen' के मुकाबले यह शेयर अभी डिस्काउंट पर मिल रहा है, जिसे लेकर मार्केट में चर्चा गर्म है।
रिस्क और निवेशकों के लिए सीख
निवेशकों को असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, जो कलेक्शन पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, RBI के नए नियमों और सेक्टर के रेगुलेटरी बदलावों का भी शेयर के भाव पर सीधा असर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपनी स्ट्रैटेजी को कितनी मजबूती से लागू कर पाती है और एसेट क्वालिटी को कैसे मेंटेन रखती है।
