Q4 में AI डील्स से मिली रफ्तार
Mphasis ने Q4 FY26 में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू रुपए में 6% तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) बढ़ा है (कॉन्स्टेंट करेंसी में 2.5%)। एनालिस्ट्स का पॉजिटिव आउटलुक कंपनी के लगातार प्रदर्शन और AI-संचालित सौदों (AI-led deal wins) में भारी उछाल से आया है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में, कंपनी के टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) में 67.5% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई, जो बेहतर कन्वर्जन रेट्स की बदौलत संभव हुआ। Mphasis की पाइपलाइन 38% बढ़ी है, जिसमें BFSI सेक्टर का बड़ा योगदान है, और इसका NeoIPTM प्लेटफॉर्म IP-led क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
AI: ग्रोथ इंजन या डिफ्लेशन का खतरा?
ब्रोकरेज फर्म Choice Institutional Equities ने Mphasis पर कवरेज शुरू करते हुए 'BUY' रेटिंग दी है और शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,625 रखा है। फर्म का अनुमान है कि FY26 से FY29 तक रेवेन्यू, EBIT और PAT में क्रमशः 12.2%, 14.3% और 14.2% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ोतरी होगी। यह अनुमान Mphasis की AI एडॉप्शन साइकिल में मजबूत पोजीशन पर आधारित है, जहां AI-आधारित डील्स इसकी पाइपलाइन का 69% हिस्सा बन चुकी हैं।
हालांकि, इस ग्रोथ को सेक्टर-व्यापी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय IT कंपनियां तेजी से 'AI डिफ्लेशन' का जोखिम देख रही हैं। इसका मतलब है कि AI ऑटोमेशन से ट्रेडिशनल IT सर्विसेज रेवेन्यू में सालाना 2-3% की कमी आ सकती है। इस बात की पुष्टि TCS के CEO ने भी की है, जिन्होंने AI के कारण कुछ क्षेत्रों में 'डिग्रोथ' का जिक्र किया था। Infosys और HCLTech के CEOs को भी यह एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहने की उम्मीद है। Mphasis की Q4 FY26 की ग्रोथ भले ही मजबूत रही हो, लेकिन यह डिफ्लेशनरी दबाव भविष्य की रेवेन्यू ग्रोथ को सीमित कर सकता है और कंपनी के मार्जिन पर असर डाल सकता है।
प्रीमियम वैल्यूएशन और ऐतिहासिक प्रदर्शन
Mphasis फिलहाल एक प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। इसका Trailing Twelve Months (TTM) P/E रेश्यो लगभग 23.5x है, जो IT सेक्टर के औसत 21x से काफी अधिक है। यह P/E बड़े प्रतिद्वंद्वियों जैसे TCS (17.9x-32x) और Infosys (16.6x-29x) से भी ज्यादा है। ऐतिहासिक रूप से, Mphasis का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। पिछले 5 सालों में, इसकी कमाई में बढ़ोतरी (6.5%) और रेवेन्यू में बढ़ोतरी (7.3%) IT इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ रेट (25.3% कमाई, 11.06% रेवेन्यू) से पिछड़ गई है। मजबूत Q4 FY26 नतीजों के बावजूद, इस अवधि में इसका मार्केट शेयर घटा है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं
पॉजिटिव एनालिस्ट रेटिंग्स और AI ग्रोथ पोटेंशियल के बावजूद, मुख्य जोखिम बने हुए हैं। Mphasis एक प्रतिस्पर्धी बाजार में काम करता है जहां TCS और Infosys जैसे बड़े IT प्लेयर्स के पास ज्यादा स्केल और व्यापक सर्विस ऑफरिंग हैं, और वे AI में भारी निवेश भी कर रहे हैं। कंपनी की ऐतिहासिक फाइनेंशियल ग्रोथ का इंडस्ट्री एवरेज से पिछड़ना, लॉन्ग-टर्म में मार्केट शेयर हासिल करने की उसकी क्षमता पर चिंताएं बढ़ाता है। इसके मौजूदा प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए मजबूत और निरंतर एग्जीक्यूशन की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, AI डील्स पर अत्यधिक निर्भरता Mphasis को 'AI डिफ्लेशन' जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है। यदि AI ट्रेडिशनल सर्विसेज की जरूरत को काफी कम कर देता है, तो इंडस्ट्री-व्यापी प्राइसिंग प्रेशर हो सकता है, जो Mphasis जैसी कंपनियों को दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा में और अधिक प्रभावित कर सकता है। भले ही ज्यादातर एनालिस्ट 'आउटपरफॉर्म' या 'बाय' रेटिंग बनाए हुए हैं, लेकिन प्राइस टारगेट में काफी डिस्पर्शन देखा जा रहा है, जो ₹2,193 से ₹3,410 तक है। यह भविष्य के प्रदर्शन पर एनालिस्ट्स के अलग-अलग विचारों को दर्शाता है।
भविष्य की राह
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि Mphasis FY26 से FY29 तक रेवेन्यू, EBIT और PAT में 12.2%, 14.3% और 14.2% का CAGR हासिल करेगा। सफलता Mphasis की प्रीमियम वैल्यूएशन को AI डिफ्लेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा के प्रभाव से संतुलित करने पर निर्भर करेगी। AI पर इसका स्ट्रेटेजिक फोकस और NeoIPTM प्लेटफॉर्म विकसित हो रहे टेक खर्च के परिदृश्य में भविष्य की ग्रोथ के लिए मुख्य डिफरेंशिएटर्स साबित होंगे।
