Vedanta Aluminium: ब्रोकरेज ने दी 'खरीद' की सलाह, ₹540 के लक्ष्य पर निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vedanta Aluminium: ब्रोकरेज ने दी 'खरीद' की सलाह, ₹540 के लक्ष्य पर निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

शेयर बाजार की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium पर अपनी कवरेज शुरू कर दी है और इसे 'खरीद' (Buy) रेटिंग दी है। फर्म ने शेयर के लिए **₹540** का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि प्रोडक्शन बढ़ाने और कच्चे माल में आत्मनिर्भरता के चलते कंपनी की कमाई में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिलेगी।

Vedanta Aluminium पर Motilal Oswal की नई रिपोर्ट

Motilal Oswal Securities ने हाल ही में डीमर्ज हुए Vedanta Aluminium बिजनेस पर एक पॉजिटिव रिपोर्ट जारी की है। ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर पर ₹540 का टारगेट प्राइस सेट किया है। फर्म का मानना है कि कंपनी का बड़ा स्केल और लागत-कुशल उत्पादक बनने पर ध्यान इसे भविष्य में अच्छी ग्रोथ दिलाएगा। भारत के सबसे बड़े प्राइमरी एल्युमिनियम उत्पादक के तौर पर, यह कंपनी अब एक फोकस्ड यूनिट के तौर पर काम कर रही है, जिससे ग्रोथ स्ट्रैटेजी को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

कमाई में जोरदार उछाल का अनुमान

ब्रोकरेज का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 26 से 28 के बीच कंपनी की कमाई में 18% से ज्यादा की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह ग्रोथ प्रोडक्शन वॉल्यूम में बढ़ोतरी और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने से आएगी, जिनकी प्रॉफिट मार्जिन अक्सर ज्यादा होती है। इससे कंपनी प्राइमरी एल्युमिनियम पर अपनी निर्भरता कम करके ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाएगी।

बैकवर्ड इंटीग्रेशन का फायदा

कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) की रणनीति, यानी कच्चे माल की सप्लाई चेन को कंट्रोल करना, इसके बिजनेस मॉडल का अहम हिस्सा है। बॉक्साइट और कोल के अपने सोर्सेज सिक्योर करके, कंपनी प्रोडक्शन कॉस्ट कम करने का लक्ष्य रखती है। सिजिमाली बॉक्साइट माइन (Sijimali bauxite mine) का डेवलपमेंट और कोल प्रोडक्शन बढ़ाना जैसे प्रोजेक्ट्स इस प्लान के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर ये सफल होते हैं, तो कंपनी ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव से बच सकेगी।

ग्लोबल और डोमेस्टिक मार्केट का माहौल

फिलहाल एल्युमिनियम सेक्टर में ग्लोबल सप्लाई टाइट है। चीन में प्रोडक्शन में कमी, यूरोप की कम आउटपुट और कुछ एक्सपोर्ट्स पर इंटरनेशनल सैंक्शन की वजह से सप्लाई सीमित है। वहीं, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट का विस्तार और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ती एक्टिविटी की वजह से डिमांड मजबूत बनी हुई है। हालांकि, यह सेक्टर साइक्लिकल है और ग्लोबल इकोनॉमिक हेल्थ और पावर कॉस्ट के प्रति बहुत सेंसिटिव है। एनर्जी प्राइस में बदलाव या इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग में स्लोडाउन कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है। निवेशकों को अब कंपनी के माइनिंग और पावर प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग और ग्लोबल मेटल प्राइस में उतार-चढ़ाव के बीच मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए।

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