Motilal Oswal ने Rubicon Research पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹1,915 का टारगेट प्राइस तय किया है। कंपनी की लगातार बढ़त और पिछले तिमाही में **95.8%** मुनाफे की उछाल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, निवेशक **166%** की जोरदार ईयर-टू-डेट रैली और बढ़ती वर्किंग कैपिटल की चिंताओं को भी ध्यान में रख रहे हैं।
Motilal Oswal का दमदार भरोसा
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Rubicon Research पर अपना 'Buy' का नज़रिया बनाए रखा है और स्टॉक के लिए ₹1,915 का बड़ा टारगेट सेट किया है। यह तब आया है जब कंपनी लिस्टिंग के बाद से लगातार चार तिमाहियों से उम्मीद से बेहतर नतीजे दे रही है।
दमदार तिमाही नतीजे
30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के नतीजे काफी शानदार रहे। Rubicon Research ने ₹534 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 51.6% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट में तो 95.8% की जबरदस्त उछाल आई और यह ₹84.8 करोड़ पर पहुंच गया। इन नतीजों के दम पर कंपनी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने EBITDA मार्जिन गाइडेंस को कम से कम 23% तक बढ़ाया है।
मार्जिन बढ़ाने की रणनीति
ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव ला रही है, जो भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए अहम है। Rubicon Research कम मार्जिन वाले बिज़नेस से दूरी बना रही है, जिससे ग्रॉस मार्जिन में सुधार हुआ है। इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और आउटसोर्स ऑपरेशंस के बीच संतुलन बनाकर कंपनी एफिशिएंसी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि इस रणनीति से फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 33% की आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट ग्रोथ हासिल हो सकती है।
जोखिम और वैल्यूएशन
हालांकि, पॉजिटिव आउटलुक के बीच निवेशकों को कुछ रिस्क फैक्टर्स पर भी गौर करना होगा। शेयर में कैलेंडर ईयर 2026 में 166% से ज्यादा का उछाल आया है और यह लगभग ₹1,808 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इस तेजी के कारण कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 23 गुना बुक वैल्यू तक पहुंच गया है, जिस पर निवेशक बारीकी से नज़र रखते हैं।
इसके अलावा, कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल भी लंबा हुआ है, जो 68.8 दिनों से बढ़कर 104 दिन हो गया है। इसका मतलब है कि कंपनी को अपने बिजनेस एक्टिविटीज को कैश में बदलने में ज्यादा समय लग रहा है, जो भविष्य में फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या?
भविष्य की बात करें तो, कंपनी की विस्तार योजनाओं का सफल कार्यान्वयन महत्वपूर्ण होगा। जून 2026 में Pithampur मैन्युफैक्चरिंग साइट का USFDA इंस्पेक्शन हुआ था, जिसमें दो प्रोसीजरल ऑब्जर्वेशन्स मिली थीं। कंपनी अब कमर्शियल रैंप-अप की तैयारी कर रही है, लेकिन इसकी अंतिम सफलता समय पर रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने और US मार्केट में प्रोडक्ट्स के सफल कमर्शियलाइजेशन पर निर्भर करेगी। निवेशक आने वाली तिमाहियों में कंपनी की मार्जिन गाइडेंस बनाए रखने और वर्किंग कैपिटल को स्टेबल करने की क्षमता पर नज़र रखेंगे।
