Motilal Oswal ने KEC International पर 'BUY' रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन लक्ष्य को घटाकर ₹580 कर दिया है। कंपनी मार्जिन दबाव का सामना कर रही है, पहली तिमाही का मुनाफा सप्लाई चेन की दिक्कतों से 42% गिरा है, लेकिन ₹40,000 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक मजबूत बना हुआ है। निवेशक कर्ज में कमी और प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन पर नजर रख रहे हैं।
KEC International पर ब्रोकरेज की राय:
Motilal Oswal ने KEC International के लिए अपनी 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखा है, हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने शेयर का टारगेट प्राइस घटाकर ₹580 प्रति शेयर कर दिया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब स्टॉक पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है और यह अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। कंपनी की हालिया तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद निवेशकों की सतर्कता साफ दिख रही है।
तिमाही नतीजों का हाल:
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी के नतीजे मिले-जुले रहे। जहां कंपनी का रेवेन्यू ₹5,024 करोड़ पर स्थिर रहा, वहीं नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 42% घटकर ₹73 करोड़ रह गया। प्रॉफिट मार्जिन भी चिंता का विषय रहे, जो पिछले साल के 7.0% से घटकर 5.8% रह गए। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, यह गिरावट लागत दबाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण हुई, खासकर पश्चिम एशिया में जारी संकट ने प्रोजेक्ट की समय-सीमा में देरी की और परिचालन लागत बढ़ा दी।
मजबूत ऑर्डर बुक और कर्ज में कमी:
इन अल्पकालिक मुश्किलों के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म कंपनी की लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक है। KEC International के पास मजबूत ऑर्डर बुक और 'L1' पोजीशन (जहां कंपनी संभावित प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली है) सहित ₹40,000 करोड़ से अधिक का बिज़नेस पाइपलाइन है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने नेट डेट (Net Debt) में ₹150 करोड़ से अधिक की कमी की है, जिससे कुल कर्ज ₹6,568 करोड़ हो गया है। कर्ज कम करने के इस प्रयास को कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
आगे क्या उम्मीद करें?
ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के वैल्यूएशन मल्टीपल (Valuation Multiple) को 18x से घटाकर 16x कर दिया है, जो निकट भविष्य में प्रॉफिट मार्जिन की रिकवरी की गति को लेकर अनिश्चितता को दर्शाता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ में बेहतर एक्जीक्यूशन और परफॉर्मेंस में सुधार स्टॉक के लिए अगले प्रमुख ट्रिगर होंगे।
निवेशकों के लिए, आने वाली तिमाहियों में सबसे महत्वपूर्ण कारक सिविल और वाटर सेगमेंट में प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन की गति और कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर करने की क्षमता होगी। वैश्विक सप्लाई चेन की दिक्कतों के बीच लागत को स्थिर रखना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
