Motilal Oswal Financial Services ने संवत 2083 के लिए भारतीय बाजार पर बुलिश रुख दिखाया है। ब्रोकरेज के अनुसार, FY27 में Nifty50 की अर्निंग्स में **16%** की ग्रोथ देखने को मिल सकती है, जो FY26 की सुस्ती से बड़ी राहत होगी।
अर्निंग्स रिकवरी की राह
Motilal Oswal के अनुसार, संवत 2083 भारतीय इक्विटी के लिए रिकवरी का साल होगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि Nifty50 का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) FY27 में 16% बढ़ेगा, जबकि उसके अगले साल यानी FY28 में 14% की ग्रोथ की उम्मीद है। यह FY26 के 5% के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है। इस ऑप्टिमिज्म के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की मजबूत फंडामेंटल्स हैं, जिसमें FY27 की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की गई है।
वैल्यूएशन का गणित
फिलहाल, Nifty50 अपने फॉरवर्ड अर्निंग्स के 17.5 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो अपने लॉन्ग-टर्म औसत से 16% नीचे है। हालांकि, स्मॉल-कैप अभी भी महंगे दिख रहे हैं और अपने औसत से 25% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ब्रोकरेज की सलाह है कि रिस्क को कम करने के लिए फिलहाल लार्ज-कैप शेयरों पर दांव लगाना बेहतर है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
बाजार के सामने कुछ बड़े मैक्रोइकॉनॉमिक हर्डल्स भी हैं। संवत 2082 में Nifty50 में 12% की गिरावट आई थी, जिसका कारण पश्चिम एशिया में तनाव और $100 प्रति बैरल के पार ब्रेंट क्रूड ऑयल रहा। इसके अलावा, सितंबर 2026 में सीपीआई (CPI) महंगाई 5.54% रही। साथ ही, FIIs ने जनवरी से सितंबर 2026 के बीच $28 बिलियन की भारी बिकवाली की है।
नवंबर 2026 से FIIs की वापसी के शुरुआती संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन निवेशकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दर नीति, ग्लोबल कमोडिटी प्राइस और ट्रेड एग्रीमेंट्स पर नजर रखनी होगी।
