Motilal Oswal Financial Services ने Fortis Healthcare पर अपनी कवरेज शुरू कर दी है। ब्रोकरेज फर्म ने शेयर के लिए 'Buy' रेटिंग दी है और ₹1,130 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी के हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक्स सेगमेंट में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ को हाइलाइट किया है।
Motilal Oswal की Fortis Healthcare पर नई शुरुआत
Motilal Oswal Financial Services ने Fortis Healthcare पर कवरेज शुरू करते हुए इसे खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने शेयर के लिए ₹1,130 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह रेटिंग कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के बाद आई है, जिसमें हॉस्पिटल्स और डायग्नोस्टिक्स बिजनेस ने अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है।
Q1 FY27 में शानदार प्रदर्शन
30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में Fortis Healthcare का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹2,545 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 17.5% ज्यादा है। कंपनी का हॉस्पिटल्स सेगमेंट, जो कुल कमाई का 85% हिस्सा है, उसने 19% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की। वहीं, डायग्नोस्टिक्स बिजनेस में भी बेहतर पेशेंट वॉल्यूम और प्रति टेस्ट रियलाइजेशन के चलते सुधार देखा गया।
एक्सपेंशन और प्रॉफिटेबिलिटी के लक्ष्य
कंपनी फिलहाल ब्राउनफील्ड एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी पर फोकस कर रही है, जिसका मतलब है कि नए हॉस्पिटल्स बनाने की बजाय मौजूदा सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2027 में 400 से अधिक बेड जोड़ने की योजना बनाई है। कंपनी ने इस तिमाही में ₹568 करोड़ का ऑपरेटिंग EBITDA (कोर बिजनेस प्रॉफिटेबिलिटी) हासिल किया है और उसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 25% EBITDA मार्जिन हासिल करना है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी एक्सपेंशन के साथ-साथ प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बेहतर बनाती है।
फाइनेंशियल हेल्थ और जोखिम
Fortis Healthcare अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। 30 जून 2026 तक, कंपनी का नेट डेट ₹2,233 करोड़ था, जो 31 मार्च 2026 के ₹2,334 करोड़ से कम है। यह डेट में कमी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।
हालांकि, निवेशकों को हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। इसमें बढ़ते कर्मचारी खर्च और अन्य ऑपरेशनल कॉस्ट के कारण मार्जिन पर दबाव शामिल है। इसके अलावा, नए बेड कैपेसिटी के टाइमली रैंप-अप से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क भी हैं। हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स दोनों ही फील्ड में कड़ी प्रतिस्पर्धा भी कंपनी की प्राइसिंग पावर और मार्केट शेयर को प्रभावित कर सकती है।
