Motilal Oswal Financial Services के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने इस स्टॉक के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,024 कर दिया है। यह बढ़ोतरी कंपनी के बिजनेस मॉडल में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है, जहां अब वह सिर्फ ट्रांजैक्शन-आधारित कमाई पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि स्थिर और रिकरिंग रेवेन्यू पर ज्यादा फोकस कर रही है।
रेवेन्यू मॉडल में बड़ा बदलाव
ICICI Securities की नई रिपोर्ट के मुताबिक, Motilal Oswal Financial Services (MOSL) अपने बिजनेस मॉडल को लगातार बदल रही है। कंपनी अब वोलेटाइल, ट्रांजैक्शन-आधारित बिजनेस से हटकर फी-आधारित (fee-based) और रिकरिंग इनकम (recurring income) पर ज्यादा जोर दे रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT), ट्रेजरी डिवीजन को छोड़कर, फाइनेंशियल ईयर 2024 की पहली तिमाही के ₹3.1 बिलियन से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹6 बिलियन से ज्यादा हो गया है।
रिकरिंग रेवेन्यू में बढ़त
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कंपनी की कमाई पर दिख रहा है। रिकरिंग रेवेन्यू, जो कि ज्यादा अनुमानित होता है, अब कंपनी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में यह हिस्सा 55% था, जो फाइनेंशियल ईयर 2026 तक बढ़कर करीब 60% हो गया है। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही तक यह 66% तक पहुंच सकता है। वहीं, फी-आधारित रेवेन्यू, जो कुल आय का करीब 41% है, अब ज्यादा स्थिर हो गया है।
एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट में ग्रोथ
कंपनी के एसेट मैनेजमेंट (Asset Management) और प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट (Private Wealth Management) सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही तक, कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) - जिसमें म्यूचुअल फंड, प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट शामिल हैं - पिछले साल की तुलना में करीब 31% बढ़कर ₹2.1 ट्रिलियन हो गया है। इसके अलावा, प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट डिवीजन में रिकरिंग एसेट्स में 40% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है।
मार्केट शेयर और जोखिम
Motilal Oswal का सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) फ्लो में मार्केट शेयर 4.3% और इक्विटी फ्लो में 4.2% है, जो उसके कुल इक्विटी मार्केट शेयर 2.4% से काफी ज्यादा है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वित्तीय सेवा क्षेत्र शेयर बाजार के प्रदर्शन के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। अगर शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो कंपनी की फी कलेक्शन (fee collection) और एसेट वैल्यूएशन (asset valuation) पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कंपनी को बड़े फाइनेंशियल ग्रुप्स और डिस्काउंट ब्रोकर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। ब्रोकरेज ने इस टारगेट प्राइस तक पहुंचने के लिए Sum-of-the-Parts वैल्यूएशन मेथड का इस्तेमाल किया है, जिसमें ब्रोकिंग, एसेट मैनेजमेंट और हाउसिंग फाइनेंस जैसे अलग-अलग सेगमेंट के लिए अलग-अलग अर्निंग मल्टीपल्स (earnings multiples) लगाए गए हैं।
