बाजार में **14%** की गिरावट के बाद Mirae Asset के CIO नीलेश सुराणा का मानना है कि अब वैल्युएशन (Valuations) काफी आकर्षक हो गए हैं। घरेलू मांग जहां बाजार को सहारा दे रही है, वहीं विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
वैल्युएशन में सुधार और बाजार की स्थिति
भारतीय बाजारों के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। Nifty 50 इंडेक्स अपने हालिया शिखर से लगभग 14% नीचे आ चुका है। Mirae Asset Mutual Fund के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर नीलेश सुराणा का कहना है कि यह करेक्शन बाजार की गर्मी को ठंडा करने के लिए जरूरी था। अब इंडेक्स का P/E रेशियो लगभग 19.3x पर आ गया है, जो 5 साल के मीडियन से 12% कम है। यह स्पष्ट संकेत है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए वैल्युएशन रिस्क अब पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है।
विदेशी बिकवाली और घरेलू मजबूती
बाजार के अच्छे वैल्युएशन के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली एक बड़ी बाधा बनी हुई है। सिर्फ सितंबर 2026 में ही FIIs ने भारतीय बाजार से ₹44,000 करोड़ से अधिक की निकासी की है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। साथ ही, वेस्ट एशिया में तनाव और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के करंट अकाउंट और महंगाई पर दबाव डाल रहा है। राहत की बात यह है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जोरदार खरीदारी करके बाजार को एक मजबूत सपोर्ट दिया है।
आगे निवेशकों की नजर कहाँ है?
बाजार की अगली दिशा अब सितंबर तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशक यह देख रहे हैं कि कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति भी फोकस में रहेगी, क्योंकि ब्याज दरों में किसी भी तरह का बदलाव कंज्यूमर डिमांड को सीधे प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, बाजार रिकवरी की उम्मीद और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच एक संतुलित स्थिति में है।
