Midcap Market: बिकवाली का दौर अपने अंतिम चरण के करीब, घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Midcap Market: बिकवाली का दौर अपने अंतिम चरण के करीब, घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा

मिडकैप शेयरों में बिकवाली अब अपने अंतिम पड़ाव (Selling Exhaustion) पर दिख रही है, जो बाजार के लिए एक बड़े टर्निंग पॉइंट का संकेत है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों के मजबूत इनफ्लो ने मार्केट को बड़ा सहारा दिया है।

भारतीय मिडकैप सेगमेंट में हाल के दिनों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई है, जिसके चलते कई स्टॉक्स के वैल्यूएशन में भारी गिरावट आई है। बाजार की भाषा में इसे 'कैपिट्यूलेशन' (Capitulation) कहा जाता है, जहाँ निराशा के माहौल में निवेशक एक साथ अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने लगते हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यही वह समय है जहाँ से बाजार रिकवरी की नींव तैयार करता है।

मिडकैप बिकवाली का गणित

इस बिकवाली की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है। मिडकैप स्टॉक्स लार्ज-कैप के मुकाबले बाजार के झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। राहत की बात यह है कि ब्याज दरों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं का काफी असर पहले ही इन स्टॉक्स में दिख चुका है, यानी अब ज्यादातर नेगेटिव खबरें 'प्राइस-इन' हो चुकी हैं।

घरेलू निवेशकों का 'सुरक्षा कवच'

पहले की तुलना में आज भारतीय शेयर बाजार की नींव बहुत मजबूत है। इसका बड़ा श्रेय SIP के जरिए आ रहे नियमित निवेश और घरेलू संस्थागत निवेशकों को जाता है। यह पैसा विदेशी बिकवाली के झटकों को सोखने का काम कर रहा है, जिससे इंडेक्स में और बड़ी गिरावट नहीं आ रही है। हालांकि बाजार में अचानक से बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है, लेकिन घरेलू सहारा बाजार को एक बॉटम (Floor) बनाने में मदद कर रहा है।

इन सेक्टरों पर रखें नजर

बाजार की कमजोरी के बीच कुछ सेक्टरों ने अपना दम दिखाया है:

  • पावर सेक्टर: अर्बनाइजेशन और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण पावर कंपनियां लगातार फोकस में हैं।
  • फार्मा सेक्टर: यह एक डिफेंसिव प्ले की तरह काम कर रहा है, क्योंकि इसकी डिमांड इकोनॉमिक साइकिल पर कम निर्भर है।
  • IT सेक्टर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाकर भारतीय आईटी कंपनियां खुद को बदल रही हैं, जिससे क्लाइंट्स की डिमांड बनी हुई है।

निवेशकों के लिए सलाह है कि वे अंधाधुंध निवेश के बजाय उन कंपनियों को चुनें जिनका कर्ज कम है और कैश फ्लो मजबूत है। आने वाले समय में बाजार की दिशा ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.