भारतीय शेयर बाजार में मार्केट ब्रेड्थ (Market Breadth) कमजोर हुई है। Nifty टोटल मार्केट के **14%** शेयर अब अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर के पास ट्रेड कर रहे हैं, जो अप्रैल में महज **2%** थे। हालांकि, यह किसी क्रैश का संकेत नहीं, बल्कि सेक्टर-स्पेसिफिक करेक्शन है।
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों 'मार्केट ब्रेड्थ' (Market Breadth) यानी बाजार की आंतरिक मजबूती में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालिया डेटा के मुताबिक, Nifty टोटल मार्केट यूनिवर्स के 14% शेयर अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर से केवल 5% की दूरी पर हैं। अप्रैल के मुकाबले यह आंकड़ा 2% से बढ़कर 14% पर पहुंचना यह दर्शाता है कि बाजार की तेजी में अब कम शेयरों का साथ मिल रहा है और ज्यादा शेयर अपनी वैल्यू खो रहे हैं।
लार्ज कैप्स दिखा रहे हैं मजबूती
जहां ब्रॉडर मार्केट दबाव में है, वहीं लार्ज कैप कंपनियां थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं। Nifty 100 इंडेक्स में शामिल करीब 20% शेयर अपने सालाना निचले स्तर के करीब हैं। हालांकि, सुकून की बात यह है कि Nifty 100 के 38% शेयर अभी भी अपने सालाना निचले स्तर से 50% ऊपर कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि यह कोई व्यापक गिरावट (Crash) नहीं है, बल्कि निवेशक अब चुन-चुनकर क्वालिटी स्टॉक्स पर दांव लगा रहे हैं।
सेक्टर के हिसाब से बदल रही है तस्वीर
बाजार में मौजूदा दबाव का कारण कोई बड़ी मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौती नहीं है। यह बिकवाली चुनिंदा सेक्टरों में केंद्रित है। विशेष रूप से पावर, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और FMCG सेक्टर के ज्यादा शेयर अपने सपोर्ट लेवल के करीब आ गए हैं। इसके उलट, हेल्थकेयर और मेटल-माइनिंग सेक्टर ने काफी मजबूती दिखाई है। यह सेक्टर डायवर्जेंस साफ करता है कि बाजार फिलहाल स्ट्रक्चरल कमजोरी के बजाय वैल्युएशन एडजस्टमेंट के दौर से गुजर रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह है कि वे केवल हेडलाइन इंडेक्स नंबर्स पर ध्यान न दें। बाजार फिलहाल सेक्टर-स्पेसिफिक अर्निंग्स और उम्मीदों पर रिएक्ट कर रहा है। आने वाले महीनों में कंपनियों के नतीजों और मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखना ही सही दिशा तय करेगा कि ये शेयर आगे संभलेंगे या अभी और समय लेंगे।
