दिग्गज निवेशक Marc Faber ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल लिक्विडिटी घटने के कारण भारत का मल्टी-ईयर बुल मार्केट अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने निवेशकों को कैश, अमेरिकी बॉन्ड्स और गोल्ड पर ध्यान देने की सलाह दी है।
बुल मार्केट का अंत?
'Gloom, Boom & Doom Report' के संपादक Marc Faber ने एक कंट्ररियन व्यू पेश करते हुए कहा है कि 2003 से चला आ रहा भारतीय इक्विटी का स्ट्रक्चरल बुल मार्केट अब अपने अंत पर है। Faber का तर्क है कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में लिक्विडिटी कम होने के कारण एसेट प्राइसेज में गिरावट का दौर शुरू हो गया है, जो पिछले दो दशकों की लगातार तेजी से बिल्कुल उलट है।
निवेशकों के लिए नई रणनीति
Faber ने सलाह दी है कि निवेशकों को अब इक्विटी में अपना एक्सपोजर कम करना चाहिए। वे लिक्विडिटी को प्राथमिकता देने की वकालत करते हैं। उनके अनुसार, 5% के आसपास चल रही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड एक अच्छा रिस्क-एडजस्टेड मौका है, जिसमें अगले 12 से 24 महीनों में रैली देखने को मिल सकती है। हालांकि, भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए इसमें करेंसी रिस्क, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम की लिमिट्स और टैक्स जैसे पेच भी शामिल हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
AI बबल और कमोडिटी पर राय
टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर Faber काफी सतर्क हैं। उनका मानना है कि AI सेक्टर का बबल अब फूट रहा है, जिसकी शुरुआत क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर कंपनियों की कमजोरी से हो चुकी है। वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि AI थीम वाले स्टॉक्स से दूरी बनाकर रखें।
इसके बजाय, वे ऑयल और प्लेटिनम जैसे कमोडिटी सेक्टर को अधिक आकर्षक मानते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने डिफेंसिव एसेट के तौर पर फिजिकल गोल्ड में निवेश बनाए रखने पर जोर दिया है।
नोट: यह Faber का अपना नजरिया है। भारतीय बाजार की चाल घरेलू आर्थिक विकास, कॉर्पोरेट अर्निंग्स और RBI की नीतियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले मार्केट ट्रेंड्स पर खुद भी नजर रखें।
