Lenskart Solutions ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (जो दिसंबर 2025 में समाप्त हुई) में अपने नतीजों से बाजार को प्रभावित किया है। कंपनी के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में पिछले साल की इसी अवधि के ₹1.85 करोड़ के मुकाबले लगभग 70 गुना का जोरदार उछाल देखा गया, जो ₹131.03 करोड़ पर पहुंच गया। रेवेन्यू के मोर्चे पर भी कंपनी ने 38.28% की ग्रोथ दर्ज की, जो ₹2,307.73 करोड़ रहा। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार से EBITDA मार्जिन 14.5% से बढ़कर 20.0% हो गया।
भारत में कंपनी के बिजनेस ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां Same-Store Sales Growth (SSSG) 27.8% और Same-Pincode Sales Growth (SPSG) 35.8% रही। इसके अलावा, कंपनी का इंटरनेशनल बिजनेस भी मुनाफे में आ गया, जहाँ पोस्ट-रेंट EBITDA मार्जिन सुधरकर 6.4% हो गया। इन नतीजों के दम पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Lenskart पर 'BUY' रेटिंग के साथ ₹600 का टारगेट प्राइस दिया है, जो भविष्य की ग्रोथ पर भरोसा दिखाता है।
हालांकि, Lenskart का ₹83,000 करोड़ से ज्यादा का मार्केट कैपिटलाइजेशन और वैल्यूएशन मल्टीपल्स कुछ चिंताएं बढ़ा रहे हैं। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 220x से 439x के बीच चल रहा है, जो कि Titan Company के आईवियर डिवीजन (लगभग 78x से 92x P/E) जैसे स्थापित साथियों की तुलना में काफी प्रीमियम है। Lenskart का प्राइस-टू-सेल्स (P/S) रेश्यो 10.6x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 1.1x और पीयर एवरेज 3x से काफी ऊपर है।
कंपनी की 53% रेवेन्यू CAGR की अनुमानित ग्रोथ और भारत के अंडरपेनेट्रेटेड आईवियर मार्केट में 53% की पहुंच (53% impactable, 35% penetration) मजबूत कैटेलिस्ट हैं। Lenskart FY28 तक भारत में 1,480 नए स्टोर खोलने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सालाना लगभग 65 स्टोर जोड़ने की योजना बना रही है। लेकिन, बढ़ते किराए, तीव्र प्रतिस्पर्धा और सप्लाई चेन की चुनौतियों जैसे व्यापक रिटेल सेक्टर के हेडविंड्स (headwinds) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विश्लेषकों का एक वर्ग इस तेजी के बावजूद सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। Lenskart अपने खर्चों का लगभग 25% कच्चे माल पर निर्भर है, जो इसे मूल्य अस्थिरता और सप्लाई चेन में बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है, खासकर चीन से आयात के मामले में। डायरेक्टोरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत जांच कर रहा है, जिसके परिणाम कंपनी की प्रतिष्ठा और वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। Profitability metrics पर भी सवाल हैं; FY25 में 'अन्य आय' को छोड़कर, Profit Before Tax (PBT) टॉपलाइन का केवल 1.5% था। इसके अलावा, कंपनी के ग्रॉस मार्जिन, भले ही बैकवर्ड इंटीग्रेशन के कारण उद्योग के औसत से कम हों, Titan जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में शुद्ध मार्जिन में खास बढ़ोतरी नहीं दिखाते। कंज्यूमर रिव्यूज़ में Lenskart के अपने ब्रांडेड लेंस की क्वालिटी को लेकर भी संदेह व्यक्त किया गया है।
भविष्य की ओर देखें तो, Lenskart मैनेजमेंट अपने टेक्नोलॉजी-संचालित, वर्टिकली इंटीग्रेटेड और ओमनीचैनल मॉडल के जरिए ग्रोथ को गति देने पर केंद्रित है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY25-28 के दौरान रेवेन्यू 25% CAGR से और प्री-IND AS EBITDA 53% CAGR से बढ़ेगा। कंपनी का लक्ष्य FY30 तक भारत में अपनी मार्केट शेयर को 5% (FY25) से बढ़ाकर 8.3% करना है। निकट अवधि में कैपिटल एक्सपेंडिचर के कारण फ्री कैश फ्लो पर असर पड़ेगा, लेकिन FY28 के बाद इसमें सुधार की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹531.50 है, जबकि Motilal Oswal जैसे विश्लेषक ₹600 का टारगेट दे रहे हैं, जो आईवियर सेक्टर में लंबी अवधि की ग्रोथ पोटेंशियल पर एक मिला-जुला पर उत्साहित दृष्टिकोण दर्शाता है।