Laser Power & Infra का IPO सब्सक्रिप्शन के लिए 9 जुलाई, 2026 को खुलेगा, जिसका लक्ष्य ₹742 करोड़ जुटाना है। कंपनी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है, जिससे भविष्य में प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) बढ़ सकती है। निवेशक 9 से 13 जुलाई के बीच ₹203 से ₹214 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर बोली लगा सकते हैं।
Laser Power & Infra का IPO: पूरी जानकारी
पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Laser Power & Infra का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 9 जुलाई, 2026 को आम निवेशकों के लिए खुलेगा। यह इश्यू 13 जुलाई, 2026 तक खुला रहेगा। कंपनी इस IPO के जरिए कुल ₹742 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इस इश्यू में ₹542 करोड़ का फ्रेश इश्यू (fresh issue) और प्रमोटर्स दीपक गोयल, राखी गोयल और देवेश गोयल द्वारा ₹200 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल हैं।
कर्ज़ घटाने की रणनीति
IPO से जुटाई गई राशि का करीब 90% हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करेगी। यह कदम निवेशकों के लिए काफी अहम है, क्योंकि कम कर्ज का मतलब है ब्याज खर्चों में कमी और इससे नेट प्रॉफिट मार्जिन (net profit margin) को बेहतर होने में मदद मिलती है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में अपने प्रॉफिट में 42% की वृद्धि दर्ज की है, जो बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन की वजह से संभव हुआ है, भले ही रेवेन्यू (revenue) में थोड़ी गिरावट आई हो। कंपनी के पास वर्तमान में ₹3,243 करोड़ का ऑर्डर बुक (order book) है, जिससे अगले 12 से 18 महीनों के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी (revenue visibility) बनी हुई है।
वैल्यूएशन और मार्केट
ऊपरी प्राइस बैंड ₹214 प्रति शेयर पर, कंपनी का वैल्यूएशन फाइनेंशियल ईयर 2026 के प्रदर्शन के आधार पर 25.3x के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर है। ब्रोकरेज फर्म SBI Securities और Swastika Investmart ने इस इश्यू पर पॉजिटिव रिपोर्ट जारी की है। उनका मानना है कि यह वैल्यूएशन पावर इंफ्रा सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मुकाबले सही है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ईस्ट इंडिया में हैं, जो केबल और कंडक्टर सेगमेंट में अपनी पोजीशन को मजबूत करती हैं। साथ ही, कंपनी की एक ग्लोबल प्लेयर के साथ टेक्निकल पार्टनरशिप भी है।
जोखिम और ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि, डेट (debt) को कम करने पर कंपनी का फोकस बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए है, लेकिन पावर इंफ्रा सेक्टर से जुड़े जोखिमों को भी समझना जरूरी है। इनमें प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (project execution) में देरी, सरकारी खर्च पर निर्भरता, और कॉपर व एल्युमीनियम जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी के पिछले प्रदर्शन से यह भी पता चलता है कि रेवेन्यू ग्रोथ हमेशा प्रॉफिट ग्रोथ के साथ नहीं चलती, इसलिए ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार कितना टिकाऊ रहता है, इस पर नजर रखनी होगी। कंपनी के शेयर 16 जुलाई, 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होने की उम्मीद है। आने वाली तिमाहियों में, शेयरधारकों को मैनेजमेंट की तरफ से ऑर्डर बुक की स्थिति और कर्ज कम होने के असर पर अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
