Ladderup Asset Managers के MD Raghvendra Nath का मानना है कि बदलती बचत आदतों के कारण Private Banks में बड़ा अवसर है। वहीं, IT सेक्टर भी वैल्यू के लिहाज से आकर्षक दिख रहा है, हालांकि इंश्योरेंस सेक्टर में रेगुलेटरी बदलावों से कमाई पर असर पड़ने की चेतावनी दी गई है।
प्राइवेट बैंकों में क्यों है दम?
Ladderup Asset Managers के मैनेजिंग डायरेक्टर Raghvendra Nath का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जिसका फायदा प्राइवेट लेंडर्स को मिलेगा। उनके अनुसार, कई प्राइवेट बैंकों का वैल्युएशन ऐतिहासिक रूप से काफी आकर्षक स्तरों पर है। इसकी बड़ी वजह भारतीयों की बचत करने की आदतों में आया बदलाव है। अब तक लोग बैंक डिपॉजिट से पैसा निकालकर रियल एस्टेट, गोल्ड और शेयर बाजार में लगा रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे इन एसेट क्लासेज का उत्साह कम होगा, पैसा वापस बैंक डिपॉजिट में आएगा। इससे बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार की पूरी उम्मीद है।
फिलहाल मार्केट में ग्लोबल टेंशन और महंगाई के चलते कंसोलिडेशन का दौर है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था का लॉन्ग-टर्म आउटलुक मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की बदौलत काफी मजबूत बना हुआ है।
इंश्योरेंस सेक्टर: रेगुलेटरी रिस्क
Raghvendra Nath ने इंश्योरेंस सेक्टर को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इंडस्ट्री में चल रही रेगुलेटरी चर्चाओं और नए प्रपोजल्स ने अनिश्चितता पैदा कर दी है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल को फिर से तैयार करना होगा। इसका सीधा असर इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है क्योंकि कंप्लायंस और ऑपरेशनल लागत बढ़ने का खतरा है।
IT सेक्टर में वैल्यू का मौका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चर्चाओं के बीच भारतीय IT सेक्टर को लेकर डर का माहौल है, लेकिन Nath इसे एक 'टैक्टिकल अपॉर्चुनिटी' मानते हैं। भारतीय कंपनियों ने AI तकनीक को तेजी से अपनाया है। इसके अलावा, कई IT कंपनियां ऐतिहासिक रूप से कम वैल्युएशन पर ट्रेड कर रही हैं और उनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। ऐसे में बाजार में स्थिरता चाहने वाले निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
आने वाले महीनों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या बैंकों में डिपॉजिट ग्रोथ वास्तव में रिकवर होती है और इंश्योरेंस रेगुलेशन को लेकर सरकार का क्या फाइनल फैसला आता है।
