Lenskart और Shriram Finance पर Kotak Securities का 'ADD' रेटिंग, जानें क्यों?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Lenskart और Shriram Finance पर Kotak Securities का 'ADD' रेटिंग, जानें क्यों?
Overview

Kotak Securities ने Lenskart और Shriram Finance को 'ADD' रेटिंग दी है। कंपनी का मानना है कि Lenskart रिटेल आईवियर में तेजी से बढ़ रहा है, जबकि Shriram Finance को कैपिटल बूस्ट और कम सेवा वाले क्षेत्रों में गहरी बाजार पहुंच का फायदा मिल रहा है।

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Kotak Securities की नजर Lenskart और Shriram Finance पर

Kotak Securities के इक्विटी रिसर्च हेड, श्रीकांत चौहन, ने Lenskart और Shriram Finance को निवेश के खास मौके के तौर पर पहचाना है, और दोनों को 'ADD' रेटिंग दी है। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच स्थिर मिड-कैप और रिटेल-केंद्रित शेयरों की तलाश कर रहे हैं। फर्म की राय Lenskart की तेज ओमनीचैनल ग्रोथ स्ट्रेटेजी और Shriram Finance की रिटेल फाइनेंसिंग में मजबूत मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर आधारित है, भले ही नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए क्रेडिट लागत बढ़ रही हो।

Lenskart का बड़ा रिटेल प्लान

Lenskart सिर्फ ऑनलाइन आईवियर बेचने वाली कंपनी से एक बड़ी ओमनीचैनल रिटेलर बनने की राह पर है। कंपनी ने FY2026 में 41% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जिसे 3,000 से अधिक फिजिकल स्टोर्स से बढ़ावा मिला है, जो बिक्री की ऊंची कीमत और वॉल्यूम बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, मई 2026 में IPO लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद स्टॉक सप्लाई बढ़ने से निवेशकों की भावना थोड़ी सतर्क है। Lenskart का वैल्यूएशन भी चिंता का विषय है, जिसका हाई ट्रेलिंग P/E रेश्यो लगातार प्रॉफिट ग्रोथ की मांग करता है, खासकर धीमे कंज्यूमर टेक मार्केट में।

Shriram Finance को कैपिटल और मार्केट रीच का बूस्ट

Shriram Finance, एक फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म, वर्तमान में एक महत्वपूर्ण कैपिटल बेस से मजबूत हुई है। अप्रैल 2026 में MUFG से मिले इक्विटी इनफ्यूजन ने इसकी कैपिटल एडिक्वेसी को 34% तक बढ़ा दिया है और AAA क्रेडिट रेटिंग दिलाई है। कंपनी ने Q4FY26 में नेट प्रॉफिट में 40.9% का साल-दर-साल इजाफा देखा। निवेशक इसके वैल्यूएशन का मूल्यांकन कर रहे हैं, जो लगभग 26x P/E पर है। यह Muthoot Finance जैसे साथियों से ज़्यादा और Bajaj Finance से कम है। ग्राहकों के साथ संबंधों पर आधारित Shriram Finance का लेंडिंग अप्रोच एक कम्पेटिटिव एडवांटेज है, लेकिन भविष्य के वैल्यूएशन गेन के लिए 4.1% का टारगेट रिटर्न ऑन एसेट्स हासिल करना महत्वपूर्ण है।

आगे की संभावित चुनौतियां

ब्रोकरेज की उम्मीदों के बावजूद, दोनों कंपनियों को संभावित जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। Lenskart को कड़ी प्रतिस्पर्धा और कंज्यूमर खर्च में कमी के खतरे का सामना करना पड़ता है, जिससे बिक्री अगर एक्सपेंशन लागत के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती है तो मार्जिन पर असर पड़ सकता है। Shriram Finance को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) का जोखिम है यदि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कैश फ्लो की समस्याएं आती हैं। कंपनी को अस्थिर ब्याज दरों के बीच नेट इंटरेस्ट मार्जिन बनाए रखने में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। प्रमोटर होल्डिंग में हाल की कमी भविष्य के विश्वास या व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों के बारे में चिंताओं का संकेत दे सकती है, जिस पर सावधानीपूर्वक नजर रखने की जरूरत है।

भविष्य की संभावनाएं और मार्केट का संदर्भ

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि Lenskart और Shriram Finance दोनों के स्टॉक प्राइस में हाल की अस्थिरता संभवतः अस्थायी है और यह किसी विशेष घटना से जुड़ी है, न कि फंडामेंटल मुद्दों से। Lenskart के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रगति और अपने शेयर प्राइस को स्थिर करना मुख्य फोकस है। Shriram Finance के लिए, बाजार यह देख रहा है कि क्या ऑपरेशनल एफिशिएंसी जारी रहती है क्योंकि यह अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। दोनों कंपनियां भारत की आर्थिक वृद्धि से काफी हद तक जुड़ी हुई हैं, और उनकी दीर्घकालिक सफलता खरीद शक्ति में निरंतर सुधार पर निर्भर करती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.