Kotak Institutional Equities ने BHEL के शेयरों पर चिंता जताई है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्टॉक की मौजूदा कीमतें उम्मीद से कहीं ज्यादा हैं और यह थर्मल पावर सेक्टर में भविष्य की मांग से मेल नहीं खातीं। पिछले **6** महीनों में शेयर **63%** भाग चुका है, लेकिन अब रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी कंपनी के लिए बड़ा रिस्क है।
पिछले 6 महीनों में BHEL का स्टॉक रॉकेट की तरह भागा है और इसने 63% का शानदार रिटर्न दिया है। इस दौरान NTPC जैसे दिग्गज शेयरों में 13% की गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, Kotak Institutional Equities का मानना है कि मार्केट का यह जोश पावर सेक्टर की बदलती जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर रहा है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप लगभग ₹1.48 लाख करोड़ है, जो भविष्य की ग्रोथ के बहुत ही ऊंचे अनुमानों पर टिका है।
वैल्यूएशन का अंतर (Valuation Gap)
Kotak ने 'रिवर्स वैल्यूएशन' का सहारा लेकर बताया है कि निवेशक इस कंपनी से आने वाले समय में 150 GW से 300 GW तक के इक्विपमेंट ऑर्डर की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, Central Electricity Authority के आंकड़े बताते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2027 से 2036 के बीच कुल थर्मल पावर कैपेसिटी केवल 86 GW से 100 GW के आसपास ही बढ़ने की उम्मीद है। यह साफ दिखाता है कि बाजार ने उम्मीद से कहीं ज्यादा डिमांड पहले ही डिस्काउंट कर ली है।
पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव
बड़ी चिंता यह है कि भारत का एनर्जी सेक्टर तेजी से बदल रहा है। सोलर और बैटरी स्टोरेज के सस्ते होने से थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता कम हो रही है। BHEL के ₹2.6 लाख करोड़ के ऑर्डर बुक का करीब 75% हिस्सा थर्मल पावर से आता है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए कुल मुनाफे का पूल ₹50 हजार करोड़ से ₹1 लाख करोड़ के बीच ही सीमित रह सकता है।
डायवर्सिफिकेशन पर है नजर
हालांकि कंपनी थर्मल से इतर न्यूक्लियर एनर्जी, कोल गैसीफिकेशन, डिफेंस और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर में हाथ पैर मार रही है। इन क्षेत्रों में कंपनी को कितनी सफलता मिलती है, यह देखना बेहद जरूरी होगा। इसके अलावा, 2016 से 2023 के बीच के कमजोर ऑर्डर साइकिल ने कंपनी की सप्लाई चेन को काफी प्रभावित किया है, जिसका असर अभी भी प्रोजेक्ट पूरा करने की गति पर दिख रहा है।
