बाजार में हालिया गिरावट के बाद Kotak Neo ने निवेशकों को नई उम्मीद दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय बाजार अब **FY28** की अनुमानित कमाई के **16 गुना (16x)** वैल्युएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जो लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है।
भारतीय शेयर बाजारों में हाल के दिनों में 10% से 15% तक की करेक्शन (गिरावट) देखी गई है। Kotak Neo की रिसर्च टीम का मानना है कि अब शेयर अपने ऐसे लेवल पर हैं जहां लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एंट्री का अच्छा मौका बन सकता है।
निफ्टी (Nifty) का क्या है हाल?
जहां मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में अभी भी भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, वहीं निफ्टी इंडेक्स 21,750 से 21,800 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट खोज रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट इकोनॉमी के कमजोर होने का संकेत नहीं, बल्कि बाजार का एक सामान्य करेक्शन है।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स
भारतीय रुपये में स्थिरता और RBI की सक्रिय भूमिका के साथ-साथ बाजार को ग्लोबल संकेतों से भी सहारा मिल रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, जो पहले 5.30% के ऊंचे स्तर पर थी, अब घटकर 4.95% पर आ गई है। हालांकि विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो हफ्तों में बिकवाली की रफ्तार में कमी आई है।
सेक्टर का गणित और सावधानी
रिसर्च के मुताबिक, लॉन्ग-टर्म के लिए मिड-साइज IT कंपनियां, प्राइवेट बैंक और टूरिज्म सेक्टर बेहतर नजर आ रहे हैं। वहीं, ऑटोमोबाइल शेयरों को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सुस्त ग्रोथ वहां दबाव डाल रही हैं।
इसके अलावा, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करने से पहले थोड़ा सतर्क रहना होगा। पिछले छह महीनों में इन शेयरों ने शानदार रैली दिखाई है, जिससे अब उनके वैल्युएशन महंगे (stretched) हो गए हैं। अस्पताल चेन पर बढ़ रही रेगुलेटरी सख्ती भी उनके मुनाफे पर असर डाल सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे अभी किसी भी शेयर में आंख बंद करके पैसा न लगाएं और सिलेक्टिव अप्रोच अपनाएं।
