Nifty Midcap 150 Index: कोटक की निवेशकों को चेतावनी, इंडेक्स के डेटा पर आंख मूंदकर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty Midcap 150 Index: कोटक की निवेशकों को चेतावनी, इंडेक्स के डेटा पर आंख मूंदकर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

Kotak Institutional Equities ने Nifty Midcap 150 इंडेक्स को लेकर एक बड़ी चिंता जताई है। ब्रोकरेज का कहना है कि बार-बार कंपनियों के बदलने के कारण यह इंडेक्स लॉन्ग-टर्म हिस्टोरिकल ट्रैकिंग के लिए भरोसेमंद नहीं है।

Kotak Institutional Equities के हालिया एनालिसिस के मुताबिक, Nifty Midcap 150 इंडेक्स का स्ट्रक्चर ऐसा है कि यह लॉन्ग-टर्म मार्केट एनालिसिस के लिए एक स्थिर टूल साबित नहीं होता। ब्रोकरेज का मानना है कि इंडेक्स का मार्केट-कैप बेस्ड रैंकिंग सिस्टम ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

कंपनियों का आता-जाता सिलसिला

इंडेक्स में कंपनियों के शामिल होने और बाहर निकलने का सिलसिला बहुत तेज है। 101 से 250 रैंक वाली कंपनियों को इसमें जगह दी जाती है, जिससे यह एक 'रिवॉल्विंग डोर' जैसा बन गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021-22 से 2027 की पहली छमाही के बीच, पूरे समय केवल 46 कंपनियां ही इस लिस्ट में बनी रहीं। वहीं, इस दौरान कुल 275 अलग-अलग कंपनियां इस इंडेक्स का हिस्सा रहीं।

क्यों चुनौतीपूर्ण है निवेश?

इंडेक्स से जुड़ी अन्य मुख्य बातें:

  • ग्रैजुएशन और रिमूवल: इस दौरान 41 कंपनियां तरक्की करके ऊपर के इंडेक्स (Nifty 50 या Nifty Next 50) में चली गईं, जबकि 129 कंपनियों को डिमोट किया गया या हटा दिया गया।
  • कंसंट्रेशन रिस्क: स्थिति इतनी अस्थिर है कि किसी भी 6 महीने की अवधि में केवल 27 कंपनियां ही पूरे इंडेक्स की 50% से ज्यादा हलचल तय कर देती हैं।

निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप कई सालों के अर्निंग ग्रोथ या वैल्यूएशन ट्रेंड्स की तुलना कर रहे हैं, तो Nifty Midcap 150 का डेटा भ्रामक हो सकता है। आज जो इंडेक्स आप देख रहे हैं, वह कुछ साल पहले वाले इंडेक्स से पूरी तरह अलग है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.