Kotak Institutional Equities ने NTPC और BHEL के वैल्युएशन में गहरा अंतर पाया है। पिछले 6 महीनों में BHEL के शेयर **64%** उछले हैं, जबकि NTPC में **12%** की गिरावट आई है। ब्रोकरेज का मानना है कि BHEL का करंट वैल्युएशन लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट के हिसाब से बहुत ज्यादा हो सकता है।
बाजार की बदलती तस्वीर
भारतीय पावर सेक्टर में इस समय दो दिग्गज कंपनियों—NTPC और BHEL—को लेकर निवेशकों का नजरिया बिल्कुल अलग है। Kotak Institutional Equities की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में BHEL ने शानदार परफॉर्मेंस दी है, जबकि NTPC का स्टॉक दबाव में रहा है। यह अंतर भविष्य की उम्मीदों और हकीकत के बीच एक बड़ा 'वैल्युएशन पैराडॉक्स' खड़ा कर रहा है।
BHEL: क्या तेजी के पीछे दम है?
BHEL का मार्केट कैप करीब ₹1.5 लाख करोड़ पहुंच चुका है। जानकारों का कहना है कि इस वैल्युएशन को सही ठहराने के लिए कंपनी को भविष्य में 150 GW से लेकर 300 GW तक की थर्मल पावर कैपेसिटी का काम करना होगा। जबकि थर्मल इक्विपमेंट से होने वाला कुल मुनाफा ₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ के बीच रहने का अनुमान है। साफ है कि हालिया तेजी पावर शॉर्टेज और डेटा सेंटर की डिमांड के सेंटीमेंट पर आधारित है, न कि रियल कैश फ्लो पर।
NTPC: सतर्क नजरिया
दूसरी ओर, मार्केट ने NTPC को अधिक सतर्कता के साथ आंका है। कंपनी का वैल्युएशन भविष्य में केवल 40 GW की एडिशनल थर्मल कैपेसिटी की उम्मीद पर टिका है। रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते बाजार NTPC को लेकर थोड़ा संभलकर चल रहा है। हालांकि, Kotak ने NTPC को 'Add' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹355 तय किया है।
बड़ा रिस्क: एनर्जी ट्रांजिशन
BHEL के लिए बड़ा रिस्क यह है कि उसकी मार्केट वैल्यू का करीब 75% हिस्सा कोयले से चलने वाले पावर प्लांट के ऑर्डर्स पर निर्भर है। अगर सेक्टर का पूरा फोकस रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ शिफ्ट होता है, तो कोल-बेस्ड ऑर्डर्स का पाइपलाइन सिकुड़ सकता है। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह देखना होगी कि पावर कैपेसिटी कितनी तेजी से बढ़ती है और पारंपरिक थर्मल पावर बनाम ग्रीन एनर्जी की लड़ाई में कौन भारी पड़ता है।
