KNR Constructions: प्रभुदास लीलाधर ने 'होल्ड' रेटिंग बरकरार, टारगेट ₹126

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
KNR Constructions: प्रभुदास लीलाधर ने 'होल्ड' रेटिंग बरकरार, टारगेट ₹126

ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने KNR Constructions पर ₹126 के टारगेट प्राइस के साथ 'होल्ड' रेटिंग बनाए रखी है। यह फैसला फाइनेंशियल ईयर 2027 की कमजोर पहली तिमाही के बाद आया है, जहाँ प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी का असर रेवेन्यू और प्रॉफिट पर पड़ा है। निवेशक अब कंपनी की प्रमुख माइनिंग और रोड प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की क्षमता पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

KNR Constructions की शुरुआत कमजोर

फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत KNR Constructions के लिए कुछ खास नहीं रही। इसी को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने स्टॉक पर अपनी 'होल्ड' रेटिंग और ₹126 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। एनालिस्ट्स का यह नजरिया कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद आया है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी के कारण रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन दोनों पर दबाव का सामना करना पड़ा।

पहली तिमाही में गिरा मुनाफा

जून 2026 में समाप्त हुई पहली तिमाही में, कंपनी ने स्टैंडअलोन रेवेन्यू में पिछले साल की तुलना में लगभग 4% की गिरावट दर्ज की, जो ₹587.94 करोड़ रहा। मुनाफे पर इसका असर और भी ज्यादा दिखा, जिसमें नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 34.5% घटकर ₹80.81 करोड़ रह गया। मैनेजमेंट ने इस मंदी का मुख्य कारण प्रमुख प्रोजेक्ट्स, खासकर हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) और माइनिंग सेगमेंट में देरी को बताया है, जिससे काम की रफ्तार धीमी पड़ गई।

मजबूत ऑर्डर बुक, पर एग्जीक्यूशन पर सवाल

हालांकि, नियर-टर्म की दिक्कतों के बावजूद, कंपनी के पास ₹87 अरब की मजबूत ऑर्डर बुक है। इसके अलावा, ₹66 अरब के ऐसे ऑर्डर भी हैं जिनमें कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली (Lowest Bidder) साबित हुई है। मैनेजमेंट ने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹2,200–2,300 करोड़ का रेवेन्यू गाइडेंस दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2028 तक एग्जीक्यूशन में काफी तेजी आएगी, जिससे 30% से ज्यादा की ग्रोथ देखने को मिल सकती है, क्योंकि कुसमंडा और बनहार्डीह माइनिंग जैसी नई परियोजनाएं अपने सक्रिय चरणों में पहुंचेंगी।

निवेशकों की चिंताएं

निवेशकों के लिए मुख्य चिंता एग्जीक्यूशन की समय-सीमा और लागत प्रबंधन को लेकर है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। कंपनी के वर्किंग कैपिटल की जरूरतें भी बढ़ी हैं, जैसा कि बढ़ते डेटर डेज (Debtor Days) से पता चलता है। लगभग ₹134 पर ट्रेड कर रहे इस स्टॉक में बाजार का सतर्क रवैया झलकता है कि क्या कंपनी इन इंडस्ट्री-वाइड दबावों के बीच अपने अनुमानित समय-सीमा को पूरा कर पाएगी।

आगे क्या?

भविष्य में, बाजार प्रतिभागी इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी अपने L1 ऑर्डर्स को कितनी तेजी से सक्रिय प्रोजेक्ट साइट्स में बदल पाती है। सितंबर 2026 में कुसमंडा MDO प्रोजेक्ट की निर्धारित शुरुआत और कंपनी की कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर कोई भी अपडेट महत्वपूर्ण होगा। कंपनी ने ₹0.25 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) भी घोषित किया है, जिसका रिकॉर्ड डेट 15 सितंबर 2026 है, और यह कैश फ्लो को सपोर्ट करने के लिए एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) की भी तलाश जारी रखे हुए है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.