वैल्यूएशन पर सवाल?
KNR Constructions के निवेशक इस समय कंपनी के ऐतिहासिक प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की मजबूती और बिगड़ते फाइनेंशियल मेट्रिक्स के बीच उलझे हुए हैं। करीब ₹3,693 करोड़ के मार्केट कैप वाली यह कंपनी पिछले एक साल में 37% से ज्यादा गिर चुकी है। कंपनी के पास लगभग ₹11,903 करोड़ का ऑर्डर बैकलॉग तो है, लेकिन इस बैकलॉग को रेवेन्यू में बदलने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 43% घट गया। मार्केट एनालिस्ट्स ने भी हाल ही में वैल्यूएशन मल्टीपल्स को 13x से घटाकर 11x कर दिया है, जो कि सिर्फ ऑर्डर बुक के आकार के बजाय कैश फ्लो की विजिबिलिटी को ज्यादा महत्व देने का संकेत है।
ऑपरेशनल दिक्कतें?
इस समस्या की जड़ सेक्टर-व्यापी इरिगेशन (सिंचाई) प्रोजेक्ट्स में चुनौतियाँ और कंपनी की अपनी वर्किंग कैपिटल की दिक्कतें हैं। KNR पर तेलंगाना सरकार से काफी बड़ी रकम बकाया है, जिससे कंपनी का पैसा फंसा हुआ है और प्रोजेक्ट पूरे होने की गति धीमी हो गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कंपनियों जैसे Larsen & Toubro के विपरीत, जिनके रेवेन्यू स्ट्रीम में संतुलन होता है, KNR का इरिगेशन सेगमेंट पर ज्यादा फोकस इसे राज्य-स्तरीय फंडिंग के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसके अलावा, ₹3,600 करोड़ के एक बड़े माइनिंग प्रोजेक्ट में देरी, जो अब अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए टल गया है, ने रेवेन्यू को और प्रभावित किया है। इसी वजह से मैनेजमेंट को EBITDA मार्जिन गाइडेंस को घटाकर 10-11% करना पड़ा है, जो कि कंपनी के पिछले 13-14% के प्रदर्शन से काफी कम है।
जोखिमों पर एक नजर
एक जोखिम-विरोधी नजरिए से देखें तो, कंपनी की संरचनात्मक कमजोरियां अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है। वर्किंग कैपिटल डेज काफी बढ़ गए हैं, जो किसी भी कैपिटल-इंटेंसिव EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) फर्म के लिए एक रेड फ्लैग है। हालांकि NCC या PNC Infratech जैसी दूसरी कंपनियां भी ऐसे ही सेक्टर दबावों से गुजर रही हैं, KNR का विशेष रूप से क्षेत्रीय राजनीतिक भुगतान जोखिमों के प्रति एक्सपोजर एक अलग लिक्विडिटी कमजोरी पैदा करता है। मैनेजमेंट ने नॉन-कोर एसेट्स बेचकर बैलेंस शीट को मजबूत करने की कोशिश की है, जैसे हाल ही में KNR Palani Infra की बिक्री, लेकिन इन कोशिशों का असर अभी तक कमाई में लगातार गिरावट और बढ़ते कर्ज-से-इक्विटी (Debt-to-Equity) प्रेशर को पूरी तरह से ऑफसेट नहीं कर पाया है।
भविष्य का अनुमान
FY27 में कंपनी की EPS (Earnings Per Share) की राह कमजोर होने के अनुमानों के बीच मार्केट का सेंटिमेंट अभी भी सतर्क है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक KNR तेलंगाना में बकाया पेमेंट की समस्या को हल नहीं कर लेती और माइनिंग व रोड एग्जीक्यूशन में तेजी नहीं लाती, तब तक यह स्टॉक ज्यादा डायवर्सिफाइड कंपनियों की तुलना में डिस्काउंट पर ट्रेड कर सकता है। ब्रोकरेज हाउसेज के बीच फिलहाल 'Reduce' या न्यूट्रल यानी तटस्थ रुख हावी है, जब तक कि तिमाही नतीजों में मार्जिन रिकवरी और कैश कन्वर्जन के स्पष्ट संकेत नहीं दिखते।
