ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Jupiter Life Line Hospitals पर अपना पॉजिटिव रुख बनाए रखा है। फर्म का अनुमान है कि कंपनी FY28 तक 17% की EBITDA ग्रोथ दर्ज कर सकती है। हाल की तिमाही में नए फैसिलिटी के खर्चों के कारण EBITDA उम्मीद से थोड़ा कम रहा, लेकिन एडजस्टेड कोर परफॉर्मेंस 13% बढ़ा। निवेशक अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि पुणे और इंदौर के नए सेंटरों में ऑक्यूपेंसी में सुधार भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन को कैसे प्रभावित करेगा।
ब्रोकरेज का पॉजिटिव आउटलुक
Prabhudas Lilladher ने Jupiter Life Line Hospitals पर अपना भरोसा फिर से जताया है और फिस्कल ईयर 2028 के लिए अपनी वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर शेयर का टारगेट प्राइस ₹360 तय किया है। यह आउटलुक कंपनी की उस स्ट्रेटेजी पर आधारित है जिसके तहत वह हाई-डेंसिटी वाले इलाकों में अपना विस्तार कर रही है, खासकर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में। इस क्षेत्र में कंपनी ने लोकल कॉम्पिटिशन के बावजूद हमेशा ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखी है।
ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और प्रॉफिटेबिलिटी
कंपनी ने फिस्कल ईयर की पहली तिमाही में ₹793 मिलियन का कंसोलिडेटेड EBITDA रिपोर्ट किया। यह आंकड़ा ब्रोकरेज की ₹830 मिलियन की उम्मीद से थोड़ा कम था। इस कमी का मुख्य कारण नए खुले डोम्बिवली यूनिट में शुरुआती ऑपरेशनल लॉसेस को माना जा रहा है। जब इन नए यूनिट के लॉसेस को अलग कर दिया जाता है, तो कंपनी के कोर बिजनेस में पिछले साल की तुलना में 13% की ग्रोथ देखने को मिली। निवेशकों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि स्थापित हॉस्पिटल यूनिट्स लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि नए हॉस्पिटल शुरू करते समय मार्जिन पर अस्थायी दबाव एक सामान्य बात है।
ग्रोथ का अनुमान और क्षमता विस्तार
ब्रोकरेज का अनुमान है कि फिस्कल ईयर 2023 से 2026 के बीच कंपनी के रेवेन्यू और EBITDA में लगभग 20% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिल सकती है। वहीं, फिस्कल ईयर 2026 से 2028 के लिए, EBITDA में 17% और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 10% की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है। इन अनुमानों का आधार यह है कि पुणे और इंदौर में कंपनी की नई सुविधाओं में ऑक्यूपेंसी रेट लगातार बढ़ेगा। जैसे-जैसे ये हॉस्पिटल्स स्टेबल हो रहे हैं, कंपनी का लक्ष्य ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिन में सुधार करना है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
Jupiter Life Line Hospitals के लिए विस्तार (Expansion) मुख्य फोकस बना हुआ है। कंपनी घनी आबादी वाले इलाकों में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स (नए अस्पताल बनाना) में निवेश कर रही है। हालांकि इन प्रोजेक्ट्स से लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन इनमें काफी कैपिटल खर्च होता है और जब तक ये फैसिलिटीज ब्रेक-ईवन यूटिलाइजेशन लेवल तक नहीं पहुंच जातीं, तब तक मार्जिन पर अस्थायी दबाव रहता है। निवेशक इन नई यूनिट्स के कमीशनिंग टाइमलाइन और ब्रेक-ईवन ऑक्यूपेंसी लेवल तक पहुंचने की गति पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि ये वो महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो तय करेंगे कि कंपनी आने वाले सालों में अपने अनुमानित प्रॉफिट ग्रोथ टारगेट को पूरा कर पाती है या नहीं।
