Juniper Hotels ने अपने विस्तार को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य FY31 तक अपने रूम की संख्या को दोगुना कर **4,000 Keys** तक पहुंचाना है। इसके लिए कंपनी **₹1,930 करोड़** का बड़ा निवेश (Capital Expenditure) करेगी। इन सबके बीच, Q1 FY27 के मजबूत नतीजों और ब्रोकरेज हाउसेस की बुलिश रिपोर्ट के बावजूद, शेयर फिलहाल अपने 52-Week Low के करीब कारोबार कर रहा है।
होटल इंडस्ट्री में नया दांव
Juniper Hotels प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है। कंपनी का प्लान है कि FY31 तक अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाकर करीब 4,000 Keys तक ले जाया जाए। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए ₹1,930 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान तैयार किया गया है। कंपनी का मानना है कि इस बड़े निवेश के लिए फंड की व्यवस्था इंटरनल कैश फ्लो से हो जाएगी, जिसे एनालिस्ट्स कंपनी की बैलेंस शीट मैनेजमेंट के लिए एक पॉजिटिव संकेत मान रहे हैं। इस विस्तार में नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ संभावित ब्राउनफील्ड एक्विजिशन (Brownfield Acquisitions) भी शामिल होंगे, जिनमें हाई-डिमांड वाले लोकेशंस पर फोकस रहेगा।
नतीजों ने जगाई उम्मीदें
निवेशकों की नजर कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर भी है। Q1 FY27 में, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹252.2 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 13% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट में शानदार 270% का उछाल देखने को मिला और यह ₹33.3 करोड़ पर पहुंच गया। नतीजों की इस ग्रोथ ने ब्रोकरेज फर्मों का ध्यान खींचा है। Axis Capital ने स्टॉक पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस को ₹330 तक बढ़ा दिया है। यह टारगेट प्राइस, स्टॉक के मौजूदा ट्रेडिंग रेंज (लगभग ₹192 से ₹197) से काफी ऊपर है, जो कि 52-Week Low के करीब चल रहा है।
आगे की राह और रिस्क
एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी का एक्सपेंशन प्लान, जिसमें दिल्ली के द्वारका में 550-Key Grand Hyatt का डेवलपमेंट भी शामिल है, कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए बेहद अहम है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY31 तक EBITDA को दोगुना कर ₹1,000 करोड़ तक पहुंचाया जाए, और साथ ही डेट-टू-EBITDA रेशियो को कंट्रोल में रखा जाए।
हालांकि, इस ग्रोथ के रास्ते में कुछ रिस्क भी हैं जिन पर नजर रखनी होगी। बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में कंस्ट्रक्शन या अप्रूवल में देरी जैसी चुनौतियां आ सकती हैं। इसके अलावा, कच्चे माल और लेबर की बढ़ती लागत से प्रोजेक्ट का खर्च ₹1,930 करोड़ के बजट से ऊपर जा सकता है। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ग्लोबल मैक्रो ट्रेंड्स के प्रति काफी सेंसिटिव होती है, और लग्जरी सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा डिमांड में मंदी आने पर ऑक्यूपेंसी रेट और रूम प्राइसिंग पर दबाव डाल सकती है।
मार्केट अब इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रखेगा। खासकर, BEN Phase 1 जैसे प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग टाइमलाइन स्टॉक के लिए एक कैटेलिस्ट का काम कर सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी के ब्राउनफील्ड एक्विजिशन पाइपलाइन पर भी निवेशकों की निगाहें रहेंगी।
