ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने बाजार से हो रही बड़ी निकासी को रोकने के लिए भारत सरकार को टैक्स रिफॉर्म्स का सुझाव दिया है। चालू फाइनेंशियल ईयर में अब तक **$16.5 बिलियन** बाहर जा चुके हैं, जिसे रोकने के लिए ब्रोकरेज ने कैपिटल गेन्स टैक्स कम करने जैसे विकल्प पेश किए हैं।
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की तरफ से बिकवाली का सिलसिला थम नहीं रहा है। चालू फाइनेंशियल ईयर में अब तक करीब $16.5 बिलियन की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर निकाली जा चुकी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा $21 बिलियन था। इस निरंतर बिकवाली ने न केवल रुपए पर दबाव बनाया है, बल्कि मार्केट में अस्थिरता भी बढ़ा दी है। इसी बीच, Jefferies ने सरकार को मार्केट की मजबूती के लिए टैक्स पॉलिसी को एक टूल के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी है।\n\n### तीन अहम पॉलिसी सुझाव\n\nJefferies ने विदेशी निवेश को भारत में बनाए रखने के लिए तीन बड़े रास्ते सुझाए हैं:\n\n1. टैक्स कटौती: सभी इन्वेस्टर्स के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स दरों में व्यापक कमी करना।\n2. टारगेटेड रिलीफ: विदेशी निवेशकों के लिए विशेष रूप से टैक्स में कटौती ताकि एंट्री बैरियर कम हो।\n3. डॉलर-बेस्ड कैलकुलेशन: विदेशी निवेशकों को अपने मुनाफे को यूएस डॉलर में कैलकुलेट करने की छूट देना, जिससे करेंसी में गिरावट की वजह से पड़ने वाला टैक्स का बोझ कम हो सके।\n\n### लार्ज-कैप स्टॉक्स पर असर\n\nअगर सरकार इन सुझावों पर विचार करती है, तो इसका सबसे बड़ा असर लार्ज-कैप स्टॉक्स पर देखने को मिलेगा। बैंकिंग सेक्टर हमेशा से विदेशी निवेशकों का पसंदीदा रहा है, वहीं एनर्जी, यूटिलिटीज और रियल एस्टेट सेक्टर में भी सेंटीमेंट बदल सकते हैं। टैक्स कम होने से निवेश की लागत घटेगी, जिससे भारत ग्लोबल स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।\n\n### चुनौतियां और हकीकत\n\nनिवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये केवल सुझाव हैं। टैक्स घटाने से सरकार का राजस्व कम हो सकता है, जिसे आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य के साथ बैलेंस करना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, यूएस ट्रेजरी यील्ड्स और ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। नवंबर 2026 की शुरुआत तक, सरकार की ओर से इन टैक्स बदलावों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
