ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने National Stock Exchange (NSE) पर कवरेज शुरू की है और इसके लिए **₹2,085** का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड जैसे नए प्रोडक्ट्स से एक्सचेंज की कमाई में जोरदार इजाफा होगा।
कमाई के नए रास्ते और डाइवर्सिफिकेशन
फिलहाल, NSE का करीब 60% रेवेन्यू इक्विटी ऑप्शंस से आता है, लेकिन Jefferies को उम्मीद है कि अगले 5 सालों में यह निर्भरता घटकर 50% पर आ जाएगी। कंपनी कमोडिटी फ्यूचर्स, ऑप्शंस और म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म जैसे नए सेगमेंट पर जोर दे रही है। अनुमान है कि 2030 तक ये नए बिजनेस रेवेन्यू और प्रॉफिट में 14% का अतिरिक्त योगदान देंगे, जिससे रिस्क काफी कम हो जाएगा।
SEBI के नियमों का असर कितना?
हाल ही में SEBI द्वारा इंडेक्स ऑप्शंस में रिटेल नुकसान को कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर बाजार में चिंता थी। हालांकि, Jefferies का कहना है कि इसका असर बहुत सीमित रहेगा। डेटा के मुताबिक, जो ट्रेडर्स इन नए नियमों से प्रभावित हो रहे हैं, वे एक्सचेंज के कुल रेवेन्यू में केवल 2 से 3% का हिस्सा रखते हैं। जैसे ही बाजार इन बदलावों के साथ एडजस्ट होगा, NSE फिर से अपनी ग्रोथ की रफ्तार पकड़ लेगा।
मार्जिन और टेक्नोलॉजी का दम
NSE अपनी टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश कर रहा है, जिससे टेक-सर्विसेज से आने वाली आय में 23% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ोतरी की उम्मीद है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कंट्रोल में रखे गए खर्चों के चलते, ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया है कि 2029 तक कंपनी का EBITDA मार्जिन बढ़कर 78% तक पहुंच जाएगा।
खास बात यह है कि Jefferies ने NSE को उसके लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी Bombay Stock Exchange (BSE) की तुलना में 15% का वैल्यूएशन प्रीमियम दिया है, जिसकी बड़ी वजह इसके बेहतर मार्जिन्स और डिविडेंड देने की क्षमता है। हालांकि, NSE अभी एक अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए निवेशकों को नई प्रोडक्ट लाइन्स के परफॉरमेंस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
