Q4 में Jana SFB का दमदार प्रदर्शन, बढ़ाई गई ब्रोकरेज टारगेट
ICICI Securities ने Jana Small Finance Bank (JSFB) पर अपना पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखा है और बैंक के शानदार चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों के बाद इसका टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹535 कर दिया है। बैंक ने 1.3% का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) और 13% का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) हासिल किया है, जो मैनेजमेंट की उम्मीदों पर खरा उतरा है। यह रिकवरी चुनौतीपूर्ण रहे फाइनेंशियल ईयर 2025 के बाद आई है और इसे अनसिक्योर्ड लोन बुक में सुधार और क्रेडिट कॉस्ट में कमी का सहारा मिला, जिसका फायदा माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में आई मजबूती से भी हुआ। विश्लेषकों का अनुमान है कि FY27 में 90% से अधिक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ग्रोथ देखने को मिल सकता है।
नतीजों को इन फैक्टर्स ने बनाया शानदार
Jana SFB के Q4 FY26 के नतीजों में खासकर अनसिक्योर्ड लेंडिंग सेगमेंट में बड़ी रिकवरी देखने को मिली। इस वापसी ने बैंक को फी और रेवेन्यू जनरेशन में फिर से रफ्तार पकड़ने में मदद की, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ी। माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के बेहतर होने से क्रेडिट कॉस्ट में कमी एक अहम फैक्टर रही। इन नतीजों से पहले ही, पिछले एक महीने में स्टॉक में करीब 27-36% का उछाल देखा गया था, जो निवेशकों के सेंटिमेंट में सकारात्मकता का संकेत देता है।
सिक्योर्ड लेंडिंग की ओर बढ़ता कदम
हालांकि, Jana SFB अब सिक्योर्ड लेंडिंग पर अपना फोकस तेजी से बढ़ा रही है। बैंक ने दिसंबर 2025 तक माइक्रोफाइनेंस लोन का हिस्सा घटाकर करीब 27% कर दिया है, जो मार्च 2024 में 40% था। अब सिक्योर्ड एडवांसेज पोर्टफोलियो का लगभग 73% हिस्सा बनाते हैं, और मैनेजमेंट इस ट्रेंड को जारी रखने की योजना बना रहा है। यह कदम माइक्रोफाइनेंस एसेट क्वालिटी को लेकर इंडस्ट्री की चिंताओं के बीच उठाया गया है। स्मॉल फाइनेंस बैंक्स (SFBs) के लिए कुल GNPA मार्च 2026 तक लगभग 3.7-3.9% रहने का अनुमान है, जबकि दिसंबर 2025 में Jana का GNPA 2.59% था। अपने पीयर्स (Peers) की तुलना में, Jana का P/E रेश्यो इंडस्ट्री के औसत 13.67x से थोड़ा ऊपर, 14.3x-15.9x के आसपास है, लेकिन AU Small Finance Bank जैसे तेजी से बढ़ रहे बैंकों (P/E 28.79x) से नीचे है।
चुनौतियां और चिंताएं
Q4 की रिकवरी के बावजूद, कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। FY27 के लिए अनुमानित PAT ग्रोथ कम बेस से है, जो मार्जिन प्रेशर को छिपा सकती है क्योंकि बैंक सिक्योर्ड लेंडिंग की ओर बढ़ रहा है, जो एक अधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र हो सकता है। Jana SFB का CASA (Current Account Savings Account) रेश्यो करीब 20% पर कम है, जिससे फंडिग के लिए महंगे होलसेल डिपॉजिट्स पर निर्भरता बढ़ जाती है। इससे फंडिग कॉस्ट और रिफाइनेंसिंग रिस्क बढ़ जाता है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अक्टूबर 2025 में Jana SFB का यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन लौटा दिया था, जिससे पता चलता है कि बैंक पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं कर पाया। प्रॉफिटेबिलिटी पर भी असर पड़ा है, FY26 के पहले नौ महीनों में ROTA गिरकर 0.61% हो गया, जो FY25 में 1.42% था। इसका मुख्य कारण माइक्रोफाइनेंस में एसेट क्वालिटी इश्यूज से क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी है।
एनालिस्ट्स का नज़रिया और भविष्य की राह
आगे देखते हुए, ICICI Securities ने ₹535 का प्राइस टारगेट सेट किया है, जो 1.1x FY27E P/ABV वैल्यूएशन का संकेत देता है। Systematix Institutional Equities का टारगेट ₹520 है। Jana SFB का मैनेजमेंट यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए फिर से आवेदन करने की योजना बना रहा है, जो मंजूरी मिलने पर एक महत्वपूर्ण कैटेलिस्ट (Catalyst) साबित हो सकता है। सिक्योर्ड लेंडिंग स्ट्रेटेजी का सफल एग्जीक्यूशन और एसेट क्वालिटी बनाए रखना स्टॉक री-रेटिंग के लिए महत्वपूर्ण होगा। एनालिस्ट्स सामूहिक रूप से 'Buy' रेटिंग की सलाह दे रहे हैं, जो बैंक के बताए लक्ष्यों को लगातार डिलीवर करने की उम्मीद पर आधारित है।
