JSW Infrastructure: शेयर में **13%** की गिरावट के बाद ब्रोकरेज ने रेटिंग बढ़ाई, जानें क्या है नई रणनीति

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AuthorAditya Rao|Published at:
JSW Infrastructure: शेयर में **13%** की गिरावट के बाद ब्रोकरेज ने रेटिंग बढ़ाई, जानें क्या है नई रणनीति

JSW Infrastructure के शेयर में आई **13%** की हालिया गिरावट को ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने एक मौका माना है। कंपनी की घरेलू कार्गो ग्रोथ और बेहतर होती रेल लॉजिस्टिक्स क्षमता को देखते हुए रेटिंग में बदलाव किया गया है, हालांकि बढ़ते खर्चों के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव अभी भी बरकरार है।

हाल ही में JSW Infrastructure के शेयर की कीमतों में करीब 13% की गिरावट आई है, जिसे देखते हुए ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने स्टॉक पर अपनी रेटिंग को अपडेट किया है। फर्म के मुताबिक, यह गिरावट कंपनी के वैल्यूएशन को फिर से आंकने का एक अवसर है। घरेलू बाजार में मजबूत मांग के चलते ब्रोकरेज अब इस शेयर को लेकर अधिक सकारात्मक है।

लॉजिस्टिक्स विस्तार और कार्गो प्रदर्शन

वित्तीय वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल कार्गो वॉल्यूम 2% बढ़कर 29.4 मिलियन टन रहा। खास बात यह है कि घरेलू ऑपरेशन्स में 8% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। पैरादीप, एन्नोर और मैंगलोर जैसे कोयला टर्मिनल पर कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल इसकी मुख्य वजह रहा।

कंपनी अपने लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए रेल रैक फ्लीट को 42 से बढ़ाकर 78 यूनिट्स तक ले गई है। अपनी खुद की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने से कंपनी थर्ड-पार्टी ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम कर रही है, जिससे कार्गो मूवमेंट की रफ्तार बढ़ेगी।

ऑपरेशन्स पर दबाव और फाइनेंशियल चुनौतियां

वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद मार्जिन पर दबाव एक चिंता का विषय है। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च और फुजैराह ऑपरेशन्स से योगदान न मिल पाने के कारण मुनाफे पर असर पड़ा है। पोर्ट सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेन्सिव है, जहां लगातार भारी खर्च की जरूरत होती है।

निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि JSW Infrastructure का बिजनेस मॉडल काफी हद तक JSW Group की अन्य कंपनियों जैसे JSW Steel और JSW Energy पर निर्भर है। अगर ग्रुप की मैन्युफैक्चरिंग या एनर्जी आउटपुट में सुस्ती आती है, तो सीधा असर पोर्ट के कार्गो पर पड़ सकता है।

जोखिम और निगरानी

पोर्ट सेक्टर कड़े नियमों के दायरे में आता है, जहां सरकारी पॉलिसी और लैंड एक्विजिशन जैसे मुद्दे प्रोजेक्ट में देरी का कारण बन सकते हैं। साथ ही, कंपनी पर पोर्ट डेवलपमेंट के लिए कर्ज का बोझ भी है, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर बैलेंस शीट पर दिख सकता है। आने वाले समय में कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन को सुधारने की क्षमता और रेल लॉजिस्टिक्स की दक्षता पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.