JSW Cement ने फाइनेंशियल ईयर **2027** की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेल्स वॉल्यूम में **26%** की बढ़त दर्ज की है। हालांकि, ईंधन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ा है, जिससे निपटने के लिए अब दाम बढ़ाए गए हैं।
JSW Cement के लिए दूसरी तिमाही काफी मिली-जुली रही। कंपनी ने कुल सेल्स वॉल्यूम में 26% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह सीमेंट वॉल्यूम में 40% और GGBS वॉल्यूम में 7% की तेजी रही है। कंपनी का नागौर स्थित नया प्लांट भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसने इस तिमाही में 70% कैपेसिटी यूटिलाइजेशन हासिल कर लिया है। हालांकि, सेल्स मिक्स में बदलाव के कारण ब्लेंडेड नेट सेल्स रियलाइजेशन में पिछली तिमाही के मुकाबले 2.2% की गिरावट आई है।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
कंपनी के मुनाफे पर डीजल की कीमतों, लॉजिस्टिक्स की लंबी दूरी और फ्यूल कॉस्ट का भारी दबाव है। नागौर प्लांट को सेटअप करने की शुरुआती लागत भी परफॉरमेंस पर हावी रही। आंकड़ों की बात करें तो कंपनी का EBITDA प्रति टन ₹707 रहा, जबकि नागौर प्लांट के प्रभाव को हटा दें तो यह ₹821 प्रति टन था। मैनेजमेंट का कहना है कि नागौर प्लांट EBITDA के लिहाज से ब्रेक-ईवन पर आ गया है और आने वाले समय में प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार की उम्मीद है।
कीमतों में बढ़ोतरी (Price Hikes)
मार्जिन को बचाने के लिए कंपनी ने अक्टूबर में अलग-अलग रीजन में कीमतों में इजाफा किया है। नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम दक्षिण में ₹15 से ₹20, पूर्व में ₹25 से ₹30, पश्चिम में ₹10 और उत्तर में ₹20 प्रति बैग तक बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा पूर्वी बाजार में ट्रेड प्राइस भी ₹10 से ₹15 प्रति बैग बढ़ा दिए गए हैं।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बढ़ी हुई कीमतें डिमांड पर असर डालेंगी और क्या कंपनी का नया कैपेसिटी विस्तार मार्जिन को फिर से पटरी पर लाने में मदद करेगा।
