JP Morgan ने EMS सेक्टर के शेयरों को लेकर निवेशकों को आगाह किया है। अगर ये कंपनियां अपने वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और ROCE में सुधार नहीं करती हैं, तो इनके वैल्यूएशन पर भारी दबाव आ सकता है।
पिछले कुछ सालों में EMS (Electronics Manufacturing Services) सेक्टर ने मार्केट में जबरदस्त रैली दिखाई है। इसकी मुख्य वजह कंपनियों के पास बढ़ते ऑर्डर बुक और सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन की उम्मीदें रही हैं। लेकिन अब JP Morgan की एक नई रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि आसान मुनाफे का दौर खत्म हो रहा है और अब मार्केट उन कंपनियों पर दबाव बनाएगा जिनका बैलेंस शीट मैनेजमेंट कमजोर है।
ROCE का खेल और चुनौती
निवेशकों का फोकस अब सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ से हटकर ROCE (Return on Capital Employed) पर आ गया है। सरल भाषा में कहें तो, यह बताता है कि कंपनी अपने हर ₹1 के निवेश पर कितना मुनाफा कमा रही है। चूंकि EMS बिजनेस काफी कैपिटल-इंटेंसिव होता है, इसलिए कंपनियों को भारी मशीनरी और महंगे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में निवेश करना पड़ता है। अगर कंपनियां एक्सपेंशन पर खर्च तो ज्यादा कर रही हैं, लेकिन रिटर्न कम मिल रहा है, तो इसका सीधा असर शेयर की कीमतों पर पड़ेगा।
वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो का संकट
JP Morgan के मुताबिक, इस सेक्टर की कई कंपनियों का काफी सारा कैश रॉ मटेरियल और इन्वेंट्री में फंसा रहता है। जब कंपनियों को अपना पैसा वापस मिलने में देरी होती है, तो उनकी Free Cash Flow कम हो जाती है। यदि आने वाली तिमाहियों में अर्निंग टारगेट्स मिस हुए, तो इन कंपनियों के P/E मल्टीपल में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
लंबी अवधि का निवेश और जोखिम
आजकल कंपनियां सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में दांव लगा रही हैं। हालांकि ये सेक्टर भविष्य के लिए बेहतर हैं, लेकिन इनका 'जेस्टेशन पीरियड' यानी मुनाफा देने का समय काफी लंबा है। आज किया गया भारी निवेश शायद अगले कुछ क्वार्टर तक मुनाफे के रूप में न दिखे, जिससे निवेशक परेशान हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए सलाह:
अब केवल ऑर्डर बुक देखकर पैसा लगाने का समय नहीं है। आने वाले समय में वही कंपनियां टिकेंगी जो अपनी सेल्स को तेजी से कैश में बदल पा रही हैं और अपने कर्ज व वर्किंग कैपिटल को कंट्रोल में रख रही हैं।
