बाजार के जानकारों का मानना है कि एक्सपोर्ट-आधारित सेक्टर जैसे कैपिटल गुड्स और केमिकल्स अगली रैली की अगुवाई करेंगे। JM Financial के हेड ऑफ रिसर्च दीपक गुप्ता ने उम्मीद जताई है कि बेहतर मार्जिन्स की बदौलत विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार का रुख करेंगे।
भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब ग्लोबल मार्केट्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। JM Financial Asset Management के हेड ऑफ रिसर्च और सीनियर फंड मैनेजर, दीपक गुप्ता के अनुसार, कैपिटल गुड्स, ऑटो एंसिलरीज़, टेक्सटाइल और केमिकल इंडस्ट्रीज ग्लोबल स्तर पर काफी कॉम्पिटिटिव हो गई हैं। ऑपरेशनल एफिशिएंसी और करेंसी का फायदा इन कंपनियों को इंटरनेशनल ट्रेड में बड़ी हिस्सेदारी दिलाने में मदद कर रहा है।
FIIs की वापसी कब होगी?
पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशक यानी FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल कैपिटल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ शिफ्ट होना रहा है। हालांकि, गुप्ता का मानना है कि यह एक अस्थायी ठहराव है। अगर भारतीय कंपनियां अगले 2 से 4 क्वार्टर्स तक अपने प्रॉफिट मार्जिन को कंसिस्टेंट रखती हैं, तो विदेशी पैसा दोबारा भारत लौटेगा।
बाजार के लिए चुनौतियां
एक्सपोर्ट सेक्टर में भले ही उम्मीदें जग रही हों, लेकिन ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव और देशों की टैरिफ पॉलिसी अभी भी एक बड़ा रिस्क हैं। अगर इंटरनेशनल ट्रेड रूल्स में बदलाव होता है, तो मैन्युफैक्चरर्स को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को इन कंपनियों के मार्जिन प्रोटेक्शन पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
मैक्रो इकोनॉमिक अपडेट और JM Financial का प्रदर्शन
ब्याज दरों को लेकर फिलहाल स्थिरता बनी हुई है और Reserve Bank of India का रुख काफी सतर्क है। महंगाई काबू में होने के कारण इंडस्ट्रियल ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। वहीं, हालिया आंकड़ों में JM Financial ने पहली तिमाही में 13% के उछाल के साथ ₹883 करोड़ का नेट रेवेन्यू दर्ज किया है। कंपनी का ध्यान फिलहाल हेल्थकेयर सेक्टर पर है, जबकि इंश्योरेंस स्पेस को लेकर वे अभी सतर्क बने हुए हैं।
