JM Financial की रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में महंगाई औसतन **5%** रहने का अनुमान है, जिससे 2026 में RBI द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि, कमजोर मानसून और कच्चे तेल की अस्थिरता जोखिम बढ़ा सकती है।
JM Financial ने अपने हालिया मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक में संकेत दिए हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) साल 2026 के बाकी बचे महीनों में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई दर फाइनेंशियल ईयर 2027 में औसतन 5% के आसपास रहेगी, जो केंद्रीय बैंक के कंफर्ट जोन के भीतर है।
रेपो रेट पर क्या है स्थिति?
RBI ने 2026 की अपनी पिछली पॉलिसी मीटिंग्स में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। ब्रोकरेज की एनालिसिस के अनुसार, दरों में कोई आक्रामक बदलाव की जरूरत नहीं है, जो मार्केट और निवेशकों के लिए राहत की बात है क्योंकि इससे कर्ज की लागत का अनुमान लगाना आसान रहता है। 25 अगस्त, 2026 को JM Financial का शेयर ₹130.39 पर बंद हुआ था।
रिस्क फैक्टर: मानसून और तेल की कीमतें
हालांकि आउटलुक स्थिर है, लेकिन ब्रोकरेज ने कुछ स्ट्रक्चरल खतरों के प्रति आगाह भी किया है। देश के लगभग 40% हिस्सों में कम बारिश दर्ज की गई है और जलाशयों का स्तर पिछले साल के 77% के मुकाबले घटकर 64% रह गया है। खराब मानसून का असर रबी सीजन की फसलों और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एक चिंता का विषय है। अगर ऊर्जा की कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
NBFC सेक्टर के लिए मायने
ब्याज दरों का स्थिर रहना Non-Banking Financial Companies (NBFCs) के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन को बेहतर मैनेज करने में मदद मिलती है। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी RBI पॉलिसी स्टेटमेंट और मंथली इन्फ्लेशन डेटा पर नजर बनाए रखें, क्योंकि किसी भी बड़े बदलाव से मार्केट का सेंटीमेंट बदल सकता है।
