JM Financial का बड़ा ऐलान: FY27 में Nifty EPS ग्रोथ का अनुमान **17.1%** तक बढ़ाया

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
JM Financial का बड़ा ऐलान: FY27 में Nifty EPS ग्रोथ का अनुमान **17.1%** तक बढ़ाया
Overview

ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने भारतीय कंपनियों के लिए एक नया अनुमान जारी किया है। कंपनी ने Nifty 50 इंडेक्स के लिए फिस्कल ईयर 2027 (FY27) तक प्रति शेयर आय (EPS) की ग्रोथ का अनुमान **15.1%** से बढ़ाकर **17.1%** कर दिया है।

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क्या हुआ?

JM Financial ने कॉरपोरेट इंडिया के लिए अपने नजरिए में बदलाव किया है। ब्रोकरेज ने Nifty 50 इंडेक्स में लिस्टेड टॉप 50 कंपनियों की कमाई के अनुमान को FY27 के लिए 17.1% तक बढ़ा दिया है, जो पहले 15.1% था। यह उम्मीद की जा रही है कि साल की शुरुआत चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद ये कंपनियां अपनी बॉटम लाइन को बेहतर बनाने में कामयाब होंगी।

सेक्टर जो बनाएंगे ग्रोथ

ब्रोकरेज ने उन खास सेक्टर्स की पहचान की है जिनसे इस ग्रोथ की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल सेक्टर 55% की कमाई के साथ सबसे आगे रहने का अनुमान है, इसके बाद टेलीकॉम सेक्टर 44% और मेटल व माइनिंग 36% की ग्रोथ दिखा सकते हैं। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) से 32% ग्रोथ की उम्मीद है। Nifty 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा वेटेज रखने वाले प्राइवेट बैंकों से 13% की स्थिर ग्रोथ का अनुमान है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों से 19% की कमाई बढ़ने की उम्मीद है।

कमाई के अनुमानों में कटौती का इतिहास

हालांकि, बढ़ा हुआ अनुमान आत्मविश्वास दिखाता है, लेकिन निवेशकों को ब्रोकरेज की चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए। हाल के वर्षों में, कंपनियों के असल नतीजों से शुरुआती ग्रोथ के अनुमान अक्सर ज्यादा रहे हैं। उदाहरण के लिए, FY26 में Nifty 50 की कमाई 4.5% ही बढ़ी, जबकि शुरुआती अनुमान 12% था। FY25 में भी 3.4% की ग्रोथ के मुकाबले 15% की उम्मीद थी। उम्मीद और असलियत के बीच यह लगातार अंतर बताता है कि निवेशकों को अपना उत्साह थोड़ा कम रखना चाहिए।

निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?

कमाई की ग्रोथ (Earnings Growth) ही शेयर की कीमतों को लंबे समय तक बढ़ाती है। जब ब्रोकरेज साल के दौरान अपने अनुमानों को कम करते हैं, तो यह अक्सर स्टॉक वैल्यूएशन के पुनर्मूल्यांकन का कारण बनता है और शेयर की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। ऑटोमोबाइल और मेटल जैसे सेक्टर्स पर निर्भरता का मतलब है कि अगर इन इंडस्ट्रीज में डिमांड कम होती है या लागत बढ़ती है, तो Nifty 50 की कुल कमाई 17.1% के नए टारगेट से कम रह सकती है। इसके अलावा, ग्लोबल पॉलिटिकल अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी कारक भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं, जो सीधे तौर पर लिस्टेड कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स लागत पर असर डालते हैं।

जोखिम और चिंताएं

खास इंडस्ट्री ट्रेंड्स के अलावा, बाहरी आर्थिक कारक भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे। साल की पहली तिमाही में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का जोखिम पैदा करती हैं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकता है अगर कंपनियां यह लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं। इसके अलावा, पब्लिक सेक्टर बैंकों, यूटिलिटीज और कंज्यूमर कंपनियों का अपने साथियों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन दिखाता है कि ग्रोथ पूरे इंडेक्स में एक समान नहीं है। निवेशक अक्सर ऐसी कंपनियों की तलाश में रहते हैं जो कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद अपना मार्जिन बनाए रख सकें।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

जैसे-जैसे फिस्कल ईयर आगे बढ़ेगा, तिमाही नतीजों (Quarterly Earnings Reports) पर नजर रखना सबसे अहम होगा। निवेशक देखेंगे कि कंपनियां इन ऊंचे अनुमानों को पूरा कर रही हैं या कमाई में कटौती के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों के ट्रेंड की निगरानी से यह पता चलेगा कि इनपुट लागत बढ़ रही है या नहीं। आखिर में, सबसे ज्यादा वेटेज वाले प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर का असल प्रदर्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर व टेलीकॉम सेक्टर्स में ऑर्डर बुक का एग्जीक्यूशन यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि 17.1% की कमाई ग्रोथ का अनुमान कितना वास्तविक है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.