ब्रोकरेज की नजर में ये 4 स्टॉक क्यों हैं दमदार?
JM Financial की ओर से इन चार भारतीय कंपनियों पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखना यह दर्शाता है कि ग्रोथ के मौके सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं हैं। Infosys के लिए, कहानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता पर केंद्रित है, जबकि Tenneco Clean Air India, Navin Fluorine International और Ahluwalia Contracts क्रमशः ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, स्पेशियलिटी केमिकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में अलग-अलग अवसर प्रदान करते हैं। फरवरी 2026 के मध्य के ये कॉल्स, व्यापक बाजार या सेक्टर की चुनौतियों से निपटने में कंपनियों की एक्जीक्यूशन क्षमता में विश्वास जगाते हैं।
Infosys: AI का सुपरपावर
Infosys के लिए, फर्म का अनुमान है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक "स्ट्रक्चरली एक्सपेंशनरी" (संरचनात्मक रूप से विस्तारवादी) शक्ति के रूप में उभरेगा, जो AI-जनित डिफ्लेशनरी दबावों को ऑफसेट कर सकता है। यह 2030 तक लगभग $300-400 बिलियन के AI सर्विसेज अवसर का लाभ उठा सकता है। Q3 FY26 में, Infosys के टॉप लाइन का 5.5% AI से आया था, और मैनेजमेंट को इसमें महत्वपूर्ण ग्रोथ की उम्मीद है। IT सेक्टर, जिसमें TCS और Wipro जैसे पीयर्स भी शामिल हैं, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड सर्विसेज की मजबूत मांग देख रहा है, हालांकि प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
Tenneco Clean Air India: मार्जिन में सुधार, नए प्रोजेक्ट्स
Tenneco Clean Air India के वैल्यूएशन को 3QFY26 में 18.6% के EBITDA मार्जिन विस्तार से सहारा मिला है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रीमियम से प्रेरित है। कंसोलिडेटेड वैल्यू एडेड रेवेन्यू (VAR) साल-दर-साल 14.7% बढ़ा। कंपनी ने महत्वपूर्ण रेवेन्यू क्षमता वाले नए प्रोग्राम हासिल किए हैं और एक मजबूत ऑर्डर बुक बनाए रखी है, जिससे FY28E तक डबल-डिजिट कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) चलने की उम्मीद है। यह भारतीय ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के सकारात्मक रुझानों को दर्शाता है, जो तेजी से लोकलाइजेशन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज की मांग देख रहा है।
Navin Fluorine International: CDMO ग्रोथ और प्रोजेक्ट्स
Navin Fluorine International, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) ऑपरेशंस में तेजी और प्रोजेक्ट नेक्टर के स्केल-अप के कारण अर्निंग्स में 15-20% तक के अपग्रेड के लिए तैयार है। JM Financial वित्त वर्ष 2028 तक INR 400-410 करोड़ के इंक्रीमेंटल EBITDA का अनुमान लगा रहा है, जिससे कुल EBITDA INR 1,630-1,640 करोड़ तक पहुंच सकता है। स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर, जिसमें Navin Fluorine काम करता है, भारत में एक हाई-ग्रोथ एरिया है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को फायदा पहुंचा रहा है।
Ahluwalia Contracts: मजबूत ऑर्डर बुक का सहारा
Ahluwalia Contracts (India) Ltd की 'Buy' रेटिंग ₹18,700 करोड़ के भारी-भरकम ऑर्डर बैक लॉग पर आधारित है, जो पिछले बारह महीनों के रेवेन्यू का 4.2 गुना है। हालांकि 3QFY26 का PAT उम्मीदों से थोड़ा कम रहा, जिसका कारण NCR क्षेत्र में GRAP स्टेज 4 प्रतिबंधों से एग्जीक्यूशन पर असर पड़ना था, रेवेन्यू 11% साल-दर-साल बढ़ा और EBITDA मार्जिन सुधरकर 9.2% हो गया। कंस्ट्रक्शन सेक्टर को रेगुलेटरी जैसे GRAP जैसे साइक्लिकल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन लगातार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन Ahluwalia Contracts जैसी कंपनियों के लिए विजिबिलिटी प्रदान करती है।
वैल्यूएशन और सेक्टर का हाल (Mid-Feb 2026 तक)
Infosys, mid-February 2026 तक, लगभग 19-20x के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके ऐतिहासिक औसत और IT सर्विसेज सेक्टर के कुछ पीयर्स की तुलना में आकर्षक लग रहा था। TCS और Wipro जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां भी समान या थोड़े उच्च P/E पर ट्रेड कर रही थीं।
Tenneco Clean Air India का प्रदर्शन भारतीय ऑटो सहायक बाजार की व्यापक मजबूती को दर्शाता है। Navin Fluorine International, 55-57x के P/E रेशियो के साथ, एक प्रीमियम वैल्यूएशन पर था, जो स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों के लिए असामान्य नहीं है। इसका निकटतम प्रतियोगी, Gujarat Fluorochemicals, भी लगभग 56-57x के उच्च P/E पर ट्रेड कर रहा था।
Ahluwalia Contracts, mid-February 2026 तक, लगभग 20-23x के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा था। कुछ एनालिस्टों के अनुसार, स्टॉक का वैल्यूएशन 'बहुत आकर्षक' से 'आकर्षक' की ओर खिसका है।
संभावित जोखिम (Bear Case)
Infosys को AI सर्विसेज स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है। Tenneco Clean Air India के लिए, पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) कंपोनेंट्स पर निर्भरता लंबी अवधि का जोखिम हो सकती है क्योंकि ऑटो इंडस्ट्री EVs की ओर बढ़ रही है। Navin Fluorine International का उच्च वैल्यूएशन, अगर ग्रोथ की उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं या प्रोजेक्ट्स में देरी होती है, तो इसे महत्वपूर्ण गिरावट के जोखिम में डालता है। Ahluwalia Contracts के लिए मुख्य जोखिम एग्जीक्यूशन की चुनौतियां हैं, जैसा कि NCR क्षेत्र में GRAP प्रतिबंधों से देखा गया। इसके अलावा ₹2,507 करोड़ की कंटिंजेंट लायबिलिटीज भी एक संभावित वित्तीय ओवरहैंग हैं।
