IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation का सितंबर तिमाही में नेट लॉस घटकर **₹1,879 करोड़** रहा है। कंपनी का रेवेन्यू **26%** बढ़ा है, लेकिन बढ़ते फ्यूल खर्चों के बीच निवेशकों की नजर अब कंपनी की ऑपरेटिंग कॉस्ट पर टिकी है।
InterGlobe Aviation (IndiGo) ने सितंबर तिमाही के लिए अपने फाइनेंशियल नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹2,582 करोड़ के मुकाबले सुधरकर ₹1,879 करोड़ पर आ गया है। इस दौरान कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में 26% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो ₹23,364 करोड़ तक पहुंच गई है।
क्यों कम हुआ घाटा?
कंपनी की कामयाबी के पीछे मजबूत 'प्राइसिंग पावर' का बड़ा हाथ रहा है। पैसेंजर यील्ड (Passenger Yield) में सालाना आधार पर 34% का उछाल आया है, जिसने कंपनी को इनपुट कॉस्ट के दबाव से निपटने में मदद दी है।
ऑपरेशनल चुनौतियों का साया
हालांकि, चुनौतियां अभी पूरी तरह टली नहीं हैं। Aviation Turbine Fuel (ATF) की कीमतों का दबाव कंपनी पर साफ दिख रहा है, जहां प्रति सीट किलोमीटर फ्यूल खर्च 68.9% तक बढ़ गया है। इसके अलावा, नॉन-फ्यूल कॉस्ट में भी हाई-सिंगल डिजिट से लो-डबल डिजिट की बढ़त की संभावना है। इसे बैलेंस करने के लिए कंपनी कार्गो और एंसिलरी सर्विस (Ancillary Services) पर अपना जोर बढ़ा रही है।
ब्रोकरेज का क्या है नजरिया?
Jefferies, Nomura और HSBC जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक पर अपनी 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। उनका मानना है कि एयरलाइन की मजबूत यील्ड मैट्रिक्स, ऑपरेशनल अस्थिरता के सामने एक अच्छा बफर (Buffer) का काम कर रही है।
आगे के लिए कंपनी ने दिसंबर तिमाही में 25% से ज्यादा PRASK (Passenger Revenue per Available Seat Kilometre) ग्रोथ का अनुमान दिया है। निवेशकों को आने वाले समय में फ्यूल की कीमतों और कंपनी के कॉस्ट मैनेजमेंट पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
