ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने InterGlobe Aviation पर अपना 'न्यूट्रल' रुख बरकरार रखा है। कंपनी को बढ़ते फ्यूल खर्च और टिकट कीमतों के बीच तालमेल बैठाने में संघर्ष करना पड़ रहा है, हालांकि कंपनी ने अपने यील्ड (yields) को **34%** तक बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है।
मुनाफे की राह में बाधाएं
Prabhudas Lilladher ने InterGlobe Aviation के लिए ₹5,177 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी मार्केट लीडर तो है, लेकिन बढ़ती लागत (Cost Pressure) के चलते मुनाफे को बढ़ाना मुश्किल हो रहा है।
क्यों बढ़ रहा है खर्च?
कंपनी के ऑपरेशनल खर्च का मुख्य पैमाना CASK (Cost per Available Seat Kilometer) तेजी से बढ़ा है। फ्यूल की कीमतों में सालाना आधार पर 69% का भारी उछाल आया है, जिससे हर सीट किलोमीटर पर खर्च ₹2.44 तक पहुंच गया है। इसके अलावा, कमजोर रुपया और कॉन्ट्रैक्ट के तहत बढ़ने वाले खर्चों की वजह से नॉन-फ्यूल कॉस्ट में भी 13.7% का इजाफा हुआ है।
क्या है मैनेजमेंट की रणनीति?
इन खर्चों की भरपाई के लिए IndiGo ने आक्रामक रूप से टिकट की कीमतें बढ़ाई हैं, जिसके चलते यील्ड में 34.3% की बढ़त हुई है और यह ₹6.3 तक पहुंच गई है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि यह बढ़ोतरी बढ़ती महंगाई के सामने नाकाफी साबित हो रही है।
आगे का आउटलुक
वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही के लिए ब्रोकरेज काफी सतर्क है। एविएशन सेक्टर में डिमांड नरम रहने के चलते कंपनी की कैपेसिटी ग्रोथ (ASKM) धीमी रह सकती है। लॉन्ग टर्म में कंपनी की ग्रोथ 11% के कंपाउंड एनुअल रेट से होने का अनुमान है। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी अपनी प्राइसिंग पावर को बनाए रख पाती है या नहीं, क्योंकि ग्लोबल क्रूड ऑयल के दाम और करेंसी में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर रहे हैं।
