Insight Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर Deven Parekh ने वेंचर कैपिटल (VC) फर्मों को AI दिग्गजों में जरूरत से ज्यादा पैसा झोंकने को लेकर आगाह किया है। उनका मानना है कि पोर्टफोलियो में विविधता की कमी बड़े जोखिम पैदा कर रही है।
वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री इन दिनों प्रमुख AI लैब्स को फंड करने की रेस में लगी है, लेकिन अब यह रणनीति सवालों के घेरे में है। Deven Parekh का कहना है कि चंद गिनी-चुनी AI कंपनियों में भारी पूंजी निवेश करने से रिस्क स्प्रेडिंग (Risk Spreading) का बुनियादी सिद्धांत दरकिनार हो रहा है।
'डबल डाउन' रणनीति का महत्व
Insight Partners की एक अलग निवेश पद्धति है। वे शुरुआत में ही बड़ा दांव लगाने के बजाय छोटे चेक से शुरुआत करते हैं। जब कंपनी के काम में दम दिखता है, तभी वे 'डबल डाउन' करते हैं। आज के मार्केट में जहां बिना नए डेटा के वैल्यूएशन आसमान छू रहे हैं, यह अनुशासित तरीका निवेशकों को भारी प्रीमियम के जोखिम से बचाता है।
लिक्विडिटी और एग्जिट की चुनौती
फिलहाल VC सेक्टर लिक्विडिटी के गंभीर दबाव में है। 2021 से 2023 के दौरान जुटाया गया फंड निवेशकों को वापस लौटाना मुश्किल हो रहा है। Parekh के अनुसार, फंड मैनेजर्स को 'DPI' (Distributed to Paid-in Capital) यानी असली मुनाफे पर ध्यान देना होगा। कंपनियों को लंबे समय तक प्राइवेट रखने से रिसोर्सेज ब्लॉक हो जाते हैं, जिससे नए अवसरों के लिए पूंजी की कमी हो जाती है।
पब्लिक मार्केट के लिए तैयारी
जैसे-जैसे OpenAI, Anthropic और SpaceX जैसी बड़ी कंपनियों के पब्लिक मार्केट में उतरने की चर्चाएं तेज हो रही हैं, सफलता के पैमाने बदल रहे हैं। प्राइवेट मार्केट में तो स्पेक्युलेटिव ग्रोथ चल जाती है, लेकिन पब्लिक लिस्टिंग के बाद निवेशकों का फोकस हाइप (Hype) से हटकर वास्तविक रेवेन्यू और मुनाफे पर शिफ्ट हो जाएगा।
