Inox Wind के शेयरों में आज यानी 10 अगस्त 2026 को लगभग **5%** की गिरावट देखी गई, शेयर **₹74** के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। यह गिरावट तब आई जब ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने कंपनी के लिए **'BUY'** रेटिंग को बरकरार रखा और टारगेट प्राइस **₹92** तय किया।
क्यों आई शेयर में गिरावट?
10 अगस्त 2026 को Inox Wind के शेयरों में गिरावट का मुख्य कारण कंपनी के तिमाही नतीजों (Quarterly Results) का बाजार की उम्मीदों पर खरा न उतरना रहा। निवेशकों ने नतीजों पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते शेयर 5% तक लुढ़क गए और ₹74 के करीब आ गए।
तिमाही नतीजे और ब्रोकरेज की राय
भले ही शेयर में गिरावट आई हो, लेकिन ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Inox Wind पर अपना भरोसा बनाए रखा है। ब्रोकरेज ने कंपनी के लिए 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखा है और शेयर का टारगेट प्राइस ₹92 रखा है।
घट गया मुनाफा, बढ़ा दबाव
कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे उम्मीद से कम रहे। Inox Wind का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 34.2% घटकर ₹64.1 करोड़ रहा। वहीं, रेवेन्यू में भी 1.5% की गिरावट आई और यह ₹814.1 करोड़ दर्ज किया गया। EBITDA मार्जिन भी घटकर 18.7% रह गया, जो पिछले साल 22.2% था। इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव है।
मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की योजनाएं
Motilal Oswal का ₹92 का टारगेट प्राइस कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक पर आधारित है, जो लगभग 4.4 GW की है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाएं अभी भी बरकरार हैं। इसके अलावा, कंपनी Wind World India के अधिग्रहण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जिसके लिए Q2 FY27 तक NCLT की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। कंपनी अपने नए 4X विंड टरबाइन प्रोटोटाइप को अगस्त 2026 तक इंस्टॉल करने की तैयारी भी कर रही है।
ध्यान देने योग्य जोखिम
ब्रोकरेज का पॉजिटिव रुख होने के बावजूद, निवेशकों को कुछ ऑपरेशनल जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी ने FY27 में 75% ईयर-ऑन-ईयर रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए प्रोजेक्ट्स का कुशल एग्जीक्यूशन जरूरी है। ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में बदलने में किसी भी तरह की देरी स्टॉक पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, कंपनी को वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कैश फ्लो पर दबाव आ सकता है। स्टील जैसी कच्ची माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। इन चुनौतियों के बीच कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की क्षमता निवेशकों के लिए अहम होगी।
