सितंबर में HRC और CRC स्टील की कीमतें **4 साल** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। कच्चे माल की बढ़ती लागत के बीच, कंपनियों के लिए डिमांड को बनाए रखना और मार्जिन बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
भारत में स्टील सेक्टर के लिए एक नया दौर शुरू हो गया है। सितंबर 2026 में हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें ₹62,000 प्रति टन पर पहुंच गई हैं, जो पिछले महीने के मुकाबले 7% अधिक है। वहीं, कोल्ड रोल्ड कॉइल (CRC) की कीमतें 8% बढ़कर ₹70,500 प्रति टन हो गई हैं, और रीबार की कीमतें भी जून के ₹48,850 से सुधरकर ₹56,800 पर पहुंच गई हैं। इंडस्ट्री अब वॉल्यूम के साथ-साथ अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।
कोकिंग कोल की मार
इस तेजी की मुख्य वजह कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी है। ऑस्ट्रेलियाई कोकिंग कोल, जो स्टील बनाने के लिए अनिवार्य है, उसकी कीमत जून 2026 के $260 से बढ़कर $300 प्रति टन हो गई है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, कोकिंग कोल की कीमत में हर $10 की बढ़ोतरी से कंपनियों पर $7 से $8 प्रति टन का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
बड़ी कंपनियां क्यों सुरक्षित हैं?
JSW Steel और Tata Steel जैसी दिग्गज कंपनियां इस स्थिति को संभालने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। इन कंपनियों का वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical Integration) मॉडल इन्हें कच्चे माल की कीमतों में होने वाली उठापटक से बचाता है, क्योंकि इनके पास अपने खुद के रिसोर्सेज मौजूद हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या मानसून के बाद स्टील की डिमांड बनी रहती है या नहीं। यदि कीमतें बहुत ज्यादा ऊपर रहीं, तो ऑटो और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर से मांग घटने का रिस्क बना हुआ है। जो छोटी स्टील कंपनियां हैं, जिनके पास अपना कच्चा माल नहीं है, उन पर मार्जिन का दबाव पड़ना तय है। आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स यह साफ कर देंगे कि स्टील कंपनियां अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को बचाने में कितनी कामयाब रही हैं।
