Steel Industry: डीलर्स के स्टॉकहोल्डिंग से स्टील के दाम में तेजी, क्या यह डिमांड का गुब्बारा फूटने वाला है?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Steel Industry: डीलर्स के स्टॉकहोल्डिंग से स्टील के दाम में तेजी, क्या यह डिमांड का गुब्बारा फूटने वाला है?

भारतीय बाजार में स्टील की कीमतें लगातार बनी हुई हैं, क्योंकि डीलर्स भविष्य में सप्लाई कम होने के डर से स्टॉक जमा कर रहे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह असली डिमांड नहीं बल्कि सट्टा है, जो बाजार की हकीकत को छिपा रहा है।

बाजार की हकीकत या डीलर्स की चाल?

घरेलू बाजार में स्टील की मजबूती के पीछे असली वजह एंड-यूजर (End-user) डिमांड नहीं, बल्कि डीलर्स का व्यवहार है। आमतौर पर डीलर्स उतनी ही खरीदारी करते हैं जितनी जरूरत होती है, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। बड़े स्टील उत्पादक अपनी क्षमता का मात्र 50% से 75% ही सप्लाई कर पा रहे हैं, जिससे घबराकर डीलर्स अपने गोदाम भर रहे हैं।

सट्टेबाजी का रिस्क

कीमतें बढ़ने की उम्मीद में की जा रही यह खरीदारी आर्टिफिशियल डिमांड पैदा कर रही है, जो स्टील कंपनियों की ग्रोथ रिपोर्ट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकती है। सरकार द्वारा लगाए गए इम्पोर्ट ड्यूटी और कोकिंग कोल की ऊंची लागत ने भी इस माहौल को सपोर्ट दिया है।

फेस्टिव सीजन और चुनौती

निवेशकों के लिए आने वाला समय सतर्क रहने वाला है। अक्टूबर-नवंबर के दौरान गुजरात समेत कई राज्यों में कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है। अगर त्योहारी सीजन में असली डिमांड नहीं दिखी, तो भारी स्टॉक जमा कर चुके स्टील प्रोड्यूसर्स को ऑर्डर में कमी का सामना करना पड़ सकता है।

स्टील पाइप सेक्टर में सबसे ज्यादा असर

इस बीच, स्टील पाइप सेगमेंट ने काफी आक्रामक रुख दिखाया है। मैन्युफैक्चरर्स ने लागत बढ़ने का हवाला देकर प्रति किलो ₹6 से ₹7 की बढ़ोतरी की है, और 1 अक्टूबर से इसमें ₹1.5 प्रति किलो का अतिरिक्त इजाफा भी लागू हो चुका है।

आने वाले महीनों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह स्टॉक टिकाऊ है या डिमांड में कमजोरी आते ही कीमतों में करेक्शन (Correction) देखने को मिलेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.