Indian Pharma Sector: फार्मा सेक्टर की दमदार रफ्तार! **13.5%** उछला बाजार, लेकिन सरकारी नियमों का साया

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Pharma Sector: फार्मा सेक्टर की दमदार रफ्तार! **13.5%** उछला बाजार, लेकिन सरकारी नियमों का साया

सितंबर 2026 में भारतीय फार्मा मार्केट ने पिछले तीन सालों का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया है। क्रोनिक थेरेपी की बढ़ती मांग से सेक्टर **13.5%** बढ़ा है, हालांकि एंटी-कैंसर दवाओं पर प्रस्तावित नए मार्जिन कैप और USFDA की सख्ती ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

भारतीय फार्मा मार्केट (IPM) ने सितंबर 2026 में साल-दर-साल 13.5% की ग्रोथ हासिल की है, जो पिछले 3 सालों में सबसे अधिक है। इस तेजी के पीछे वॉल्यूम में हुई 3.5% की बढ़ोतरी मुख्य वजह है, जो बीते 2 सालों का उच्चतम स्तर है। ब्रोकरेज फर्म Nomura ने इस सेक्टर पर सकारात्मक नजरिया बनाए रखा है और घरेलू कंपनियों के मजबूत पोर्टफोलियो की सराहना की है।

क्रोनिक थेरेपी का कमाल

सेक्टर की इस ग्रोथ को कार्डियोलॉजी, डायबिटीज और न्यूरो-CNS जैसे क्रोनिक सेगमेंट्स से काफी सपोर्ट मिला है। विशेष रूप से ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार) सेगमेंट ने शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 20% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है। Sun Pharmaceutical Industries और Zydus Lifesciences जैसी दिग्गज कंपनियां अपने विविधतापूर्ण पोर्टफोलियो के दम पर इस रैली में सबसे आगे रही हैं।

रेगुलेटरी चुनौतियां

बाजार में हलचल के बीच सरकार के नए फैसलों पर निवेशकों की नजरें हैं। सरकार 110 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित करने की योजना बना रही है। यह नियम अक्टूबर 2026 में लागू हो सकता है, जिससे संबंधित कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

इसके साथ ही, Dr. Reddy’s Laboratories के लिए भी चुनौती बढ़ी है। आंध्र प्रदेश स्थित कंपनी की FTO-11 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के निरीक्षण के बाद USFDA ने 2 ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी किया है। हालांकि फार्मा सेक्टर में ऐसी रेगुलेटरी प्रक्रियाएं आम हैं, लेकिन इनका सीधा असर प्रोडक्ट अप्रूवल और कंप्लायंस खर्च पर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

फिलहाल, निवेशकों को ट्रेड मार्जिन कैप से जुड़ी फाइनल नोटिफिकेशन और कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग कंप्लायंस डेटा पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। ग्लोबल मार्केट में करेंसी उतार-चढ़ाव और जेनेरिक दवाओं की कीमतों का दबाव भी आने वाले समय में प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.