इंडियन ऑयल (Indian Oil) के निवेशकों के लिए अच्छी खबर आई है। ब्रोकरेज फर्म प्रभास लिलाधर (Prabhudas Lilladher) ने कंपनी की रेटिंग को 'Reduce' से बढ़ाकर 'Accumulate' कर दिया है और टारगेट प्राइस को ₹147 कर दिया है। यह अपग्रेड कंपनी के दमदार रिफाइनिंग मार्जिन और सरकारी समर्थन की उम्मीदों के चलते हुआ है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कंपनी ने इस तिमाही में नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है।
मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन पर दांव
प्रभास लिलाधर की रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने $19.1 प्रति बैरल का मजबूत कोर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) हासिल किया है। यह कैलकुलेशन स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए और इन्वेंट्री से जुड़े नुकसान को हटाकर की गई है।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस में उछाल
कंपनी के रिफाइनिंग सेगमेंट ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। नेट SAED GRM बढ़कर $15.6 प्रति बैरल हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में सिर्फ $2.2 प्रति बैरल था। हालांकि, कंपनी को ₹150 बिलियन का फिनिश्ड गुड्स इन्वेंट्री गेन मिला, लेकिन क्रूड इन्वेंट्री लॉसेस के कारण इसमें कुछ कमी आई। स्टैंडअलोन EBITDA ₹20.2 बिलियन दर्ज किया गया। इन ऑपरेशनल उछालों के बावजूद, इंडियन ऑयल ने तिमाही में ₹26.6 बिलियन का नेट लॉस रिपोर्ट किया, जो बाजार की उम्मीदों से कम है।
भविष्य की रणनीति और कैपेक्स
कंपनी LPG अंडर-रिकवरी को मैनेज कर रही है, जिसका अनुमान फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के लिए प्रति सिलेंडर ₹250 लगाया गया है। मैनेजमेंट ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹327 बिलियन के कैपिटल स्पेंडिंग (CapEx) गाइडेंस की पुष्टि की है। कंपनी अपनी रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार कर रही है, FY27 के लिए 77 मिलियन मीट्रिक टन और FY29 तक 90 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का लक्ष्य है, क्योंकि नई परियोजनाएं चालू होंगी।
वैल्यूएशन और आगे क्या देखें?
ब्रोकरेज ने स्टॉक के लिए अपना वैल्यूएशन मल्टीपल रिवाइज्ड कर FY28 के प्राइस-टू-बुक वैल्यू का 0.8 गुना कर दिया है, जो पहले 0.7 गुना था। यह एडजस्टमेंट ₹147 के नए प्राइस टारगेट को सपोर्ट करता है। निवेशकों के लिए, मुख्य चिंता रिफाइनिंग मार्जिन की वास्तविक प्राप्ति और रिफाइनरी क्षमता विस्तार की प्रगति पर बनी रहेगी। जबकि अंडर-रिकवरी के लिए सरकारी समर्थन वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, कंपनी की अस्थिर क्रूड कीमतों से निपटने की क्षमता और भारी कैपिटल स्पेंडिंग पाइपलाइन को मैनेज करना भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी को निर्धारित करेगा। निवेशक आगामी तिमाही नतीजों पर नजर रख सकते हैं कि क्या ग्लोबल ऑयल कीमतों और घरेलू नियामक नीतियों में बदलाव के बीच कोर मार्जिन की मजबूती बनी रहती है।
