बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच Nifty 50 ने मजबूती दिखाई है। 11 सितंबर से 2 नवंबर, 2026 के बीच जहाँ लार्ज-कैप स्टॉक्स केवल **0.5%** गिरे, वहीं मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स में **6%** से **7%** तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
11 सितंबर से 2 नवंबर, 2026 के बीच भारतीय शेयर बाजार में लार्ज-कैप और मिड-स्मॉल कैप के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहाँ Nifty 50 बेंचमार्क में मामूली 0.5% की गिरावट आई, वहीं Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स क्रमश: 7% और 6.6% तक टूट गए। यह अंतर साफ करता है कि बाजार में जोखिम बढ़ने पर निवेशक अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं।
निवेशक क्यों चुन रहे हैं लार्ज-कैप्स?
साल की शुरुआत में निवेशक जोखिम लेने के मूड में थे, जिससे छोटे शेयरों में तेजी थी। लेकिन अब माहौल बदल गया है। निवेशक अब 'सेफ्टी' को प्राथमिकता दे रहे हैं। लार्ज-कैप कंपनियां बेहतर बैलेंस शीट और मजबूत कैश फ्लो के कारण अनिश्चित समय में एक डिफेंसिव विकल्प मानी जाती हैं।
इसके अलावा 'लिक्विडिटी' (Liquidity) भी बड़ा कारण है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली से बाजार में वोलेटिलिटी बढ़ी है। लार्ज-कैप स्टॉक्स, खासकर बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर के शेयर, भारी बिकवाली को झेलने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी प्रदान करते हैं। इसके उलट, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में वॉल्यूम कम होने के कारण वे बिकवाली के दबाव को नहीं झेल पाते।
किन बातों पर रखें नजर?
Bajaj Broking के जानकारों का मानना है कि निवेशक अब क्वालिटी और लिक्विडिटी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। आने वाले समय में मार्केट पर कई मैक्रो फैक्टर्स का असर पड़ेगा, जैसे US इंटरेस्ट रेट्स, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव। अगले 6 से 18 महीनों के लिए पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए बाजार लार्ज-कैप्स की स्थिरता पर भरोसा जता रहा है।
