ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी के मुताबिक, इंडियन आईटी सेक्टर के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 से एक नए और मल्टी-ईयर ग्रोथ फेज की शुरुआत होने वाली है। ग्लोबल क्लाइंट्स अब एआई (AI) क्षमता बढ़ाने के बजाय उससे मिलने वाले ठोस रिटर्न पर जोर दे रहे हैं।
एआई (AI) क्षमता से ROI की ओर बढ़ता कदम
बीते कुछ सालों में दुनिया भर की बड़ी कंपनियों ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। अब यह दौर एक नए पड़ाव पर है, जहां कॉर्पोरेट बोर्ड्स और फाइनेंशियल ऑफिसर्स प्रयोगों से आगे बढ़कर वास्तविक मुनाफे (ROI) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस बदलाव का सीधा फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को मिल रहा है, जो सिस्टम इंटीग्रेशन, डेटा गवर्नेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे जटिल कामों में माहिर हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि एआई से सेवाओं के खत्म होने का डर बेबुनियाद है, बल्कि यह आईटी वेंडर्स के लिए बाजार का दायरा बढ़ा रहा है।
प्रमुख आईटी कंपनियों के आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि भी कर रहे हैं। TCS ने एआई-आधारित काम से $2.6 बिलियन का सालाना रेवेन्यू दर्ज किया है, वहीं Infosys का कुल रेवेन्यू का लगभग 8.2% हिस्सा इन्हीं सेवाओं से आ रहा है। इसके अलावा HCL Technologies और LTIMindtree भी अपनी क्षमताओं को इस मांग को पूरा करने के लिए तेजी से अपग्रेड कर रहे हैं।
राह में आने वाली चुनौतियां
FY27 की सुखद तस्वीर के बावजूद, निकट भविष्य में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण क्लाइंट्स का डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग (विवेकपूर्ण खर्च) पर लगाम लग सकती है। इसके अलावा, एआई-लेड डिफ्लेशन का भी खतरा है, जो पारंपरिक सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स की प्राइसिंग पावर को प्रभावित कर सकता है।
मार्जिन पर भी दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कंपनियां हायरिंग और प्रोजेक्ट माइग्रेशन पर भारी निवेश कर रही हैं। खासकर मिड-कैप आईटी कंपनियों के लिए चुनौती अधिक हो सकती है, यदि हाइपरस्केलर्स नए प्रोजेक्ट्स के बजाय कॉस्ट-सेविंग को प्राथमिकता देते हैं। अंत में, आईटी कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी तेजी से अपने टैलेंट पूल को हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार करती हैं और मुनाफे को बचाए रखती हैं।
