Indian Equities: FIIs की बिकवाली थमी, रिकवरी के लिए तैयार है बाजार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Equities: FIIs की बिकवाली थमी, रिकवरी के लिए तैयार है बाजार

भारतीय बाजारों के लिए अच्छी खबर है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली कम होने से बाजार को सहारा मिला है। अब सबकी नजरें कॉर्पोरेट अर्निंग्स और IRDAI के नए नियमों पर टिकी हैं जो इंश्योरेंस सेक्टर की तस्वीर बदल सकते हैं।

बाजार की मौजूदा स्थिति

फिलहाल Nifty 50 इंडेक्स 22,750 के आसपास ट्रेड कर रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस साल देखी गई 14% की गिरावट का दौर अब पीछे छूट चुका है। मार्केट में आई घबराहट के बीच राहत की बात यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से होने वाली भारी बिकवाली अब सुस्त पड़ रही है। यह इस बात का संकेत है कि निगेटिव सेंटीमेंट पहले ही स्टॉक प्राइस में एडजस्ट हो चुके हैं, जिससे और बड़ी गिरावट की आशंका सीमित है।

रिकवरी का असली इंजन

बाजार को फिर से रफ्तार देने के लिए केवल बिकवाली रुकना काफी नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि कंपनियां कैसा प्रदर्शन करती हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में Nifty 50 कंपनियों के मुनाफे में 27% की उछाल का अनुमान है। अगर कंपनियां उम्मीदों पर खरी उतरती हैं, तो विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजार का रुख कर सकते हैं। IT और बैंकिंग सेक्टर से मिले शुरुआती संकेत पॉजिटिव हैं, लेकिन आने वाले कुछ महीने काफी अहम रहेंगे।

चुनौती: कच्चा तेल और वैश्विक दबाव

बाजार के सामने अभी भी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। Brent crude oil की कीमतें US$ 110 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भारत के लिए इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ाती हैं, जो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में टेक और AI सेक्टर में फंडिंग की समस्या और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले बाजार को एक दायरे (Range) में रख सकते हैं।

इंश्योरेंस सेक्टर पर IRDAI का कड़ा रुख

रेगुलेटरी मोर्चे पर, Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च की सीमा 12.5% और जनरल इंश्योरेंस के लिए 20% तय की जा सकती है। यह कदम बड़ी और डिजिटल रूप से मजबूत कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा, जबकि छोटी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मुनाफे का संकट खड़ा हो सकता है, जिससे इंडस्ट्री में consolidation के आसार बढ़ गए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.