जून तिमाही में Indian CDMO सेक्टर ने बेहतर रफ्तार पकड़ी है, जिसे कॉम्प्लेक्स दवाओं की मांग और सप्लाई चेन शिफ्ट से सपोर्ट मिला है। हालांकि, सेक्टर के प्रदर्शन में बड़ी खाई है, जहां Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसे दिग्गज आउटपरफॉर्म कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट हाथ से निकलने के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
इंडियन CDMO (कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर ने जून तिमाही (Q1 FY27) में शानदार रिकवरी दिखाई है। इंडस्ट्री का ओवरऑल रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले लगभग 19% बढ़ा है, जो पिछली तिमाही के सिंगल-डिजिट ग्रोथ के मुकाबले एक बड़ी राहत है।
कौन बना बाजीगर, कौन फिसला?
सेक्टर का प्रदर्शन इस बार बंटा हुआ नजर आ रहा है। Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियों ने स्पेशलाइज्ड दवाओं की ग्लोबल डिमांड का भरपूर फायदा उठाया है। Divi’s Laboratories का रेवेन्यू 27.8% उछला है, जबकि प्रॉफिट में 65.5% की दमदार बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, Laurus Labs का CDMO रेवेन्यू तो लगभग 70% तक बढ़ गया है, जिसके बाद कंपनी ने अपना एक्सपेंशन प्लान भी तेज कर दिया है।
इसके उलट, Syngene International जैसे खिलाड़ियों के लिए समय चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी के रेवेन्यू में 16% की गिरावट आई है, जिसकी मुख्य वजह एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट का छिन जाना और फॉरेक्स (Forex) अस्थिरता बताई गई है। यह अंतर साफ करता है कि भले ही पूरी इंडस्ट्री 'China+1' स्ट्रैटेजी का फायदा उठा रही है, लेकिन असली बाजी वही मार रहे हैं जिनकी क्लाइंट रिलेशनशिप और तकनीकी क्षमताएं मजबूत हैं।
भविष्य की राह और रिस्क
पेप्टाइड्स (Peptides) और ADC (एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स) जैसे हाई-वैल्यू सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों की डिमांड अभी काफी ज्यादा है। हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- क्लाइंट कंसंट्रेशन: एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट का नुकसान पूरी बैलेंस शीट बिगाड़ सकता है।
- बायोटेक फंडिंग: अगर बायोटेक कंपनियों के पास फंडिंग कम होती है, तो वे अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स को टाल देती हैं, जिसका सीधा असर CDMO कंपनियों के ऑर्डर बुक पर पड़ता है।
- रेगुलेटरी सख्ती: USFDA और EMA जैसे ग्लोबल रेगुलेटर लगातार क्वालिटी मानकों की निगरानी कर रहे हैं। किसी भी चूक से इंपोर्ट अलर्ट का खतरा बना रहता है।
अगले कुछ महीनों में, निवेशकों को कंपनियों की ऑर्डर बुक एग्जीक्यूशन और मैनेजमेंट की क्लाइंट रिटेंशन पर दी गई कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए, जो यह तय करेगी कि यह परफॉर्मेंस गैप आगे और बढ़ेगा या कम होगा।
